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इंजरी के बाद श्रेयस अय्यर का पहला रिएक्शन आया सामने, चोट को लेकर दिया अपडेट

श्रेयस अय्यर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे मैच के दौरान चोट का सामना करना पड़ा था. ऐसे में अब इंजरी के बाद उनका पहला रिएक्शन सामने आया है.

@mufaddal_vohra (X)
Praveen Kumar Mishra

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के वनडे उप-कप्तान श्रेयस अय्यर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में लगी गंभीर चोट के बाद पहली बार अपनी सेहत का अपडेट दिया है. सिडनी में हुए इस हादसे के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था लेकिन अब वे ठीक हो रहे हैं. 

श्रेयस ने सोशल मीडिया पर फैंस का शुक्रिया अदा किया और बताया कि वे हर दिन बेहतर महसूस कर रहे हैं. दरअसल, श्रेयस अय्यर को चोट तब लगी जब वे एलेक्स कैरी का मुश्किल रनिंग कैच लेने की कोशिश कर रहे थे. यह कैच हर्षित राना की गेंद पर आया. कैच तो पूरा हुआ लेकिन श्रेयस को पसलियों में तेज दर्द हुआ.

श्रेयस अय्यर की स्प्लीन में लगी थी चोट

श्रेयस अय्यर की चोट के बाद जांच में पता चला कि स्प्लीन में चीरा लग गया है, जिससे अंदरूनी रक्तस्राव हो रहा था. इसी वजह से उन्हें आईसीयू में रखा गया. बीसीसीआई ने बताया कि चोट की तुरंत पहचान हुई और ब्लडिंग रोक दी गई. अब उनकी स्थिति स्थिर है और वे निगरानी में हैं.

श्रेयस का सोशल मीडिया पोस्ट

श्रेयस ने एक्स पर लिखा, "मैं अभी रिकवरी की प्रक्रिया में हूं और हर गुजरते दिन के साथ बेहतर हो रहा हूं. सभी की दयालु शुभकामनाओं और सपोर्ट के लिए मैं बहुत आभारी हूं. यह सच में बहुत मायने रखता है. मुझे अपनी यादों में रखने के लिए धन्यवाद."

बीसीसीआई का आधिकारिक बयान

बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने 28 अक्टूबर को दोबारा स्कैन करवाया, जिसमें सुधार दिखा. बयान में कहा गया, "चोट की जल्दी पहचान हुई और ब्लडिंग रोक दी गई. अब श्रेयस की हालत स्थिर है और वे ठीक होने की राह पर हैं. सिडनी और भारत के स्पेशलिस्ट डॉक्टर उनकी प्रोग्रेस पर नजर रख रहे हैं."

टीम इंडिया की प्रतिक्रिया

टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कैनबरा में सीरीज की शुरुआत से पहले कहा, "हमने श्रेयस से बात की, वे नॉर्मल बोल रहे थे तो राहत मिली. डॉक्टरों ने कहा यह दुर्लभ हादसा है, जो कभी-कभी खास टैलेंट के साथ होता है."

रिकवरी में कितना समय लगेगा?

स्प्लीन की चोट को पूरी तरह ठीक होने में 6 से 12 हफ्ते लग सकते हैं. इस दौरान डॉक्टर सख्ती से कहते हैं कि कोई फिजिकल कॉन्टैक्ट, झटका या भारी काम न करें. दूसरा झटका लगने से चोट दोबारा खुल सकती है और ब्लडिंग शुरू हो सकती है.