भारत के इस शहर को कहते हैं 'मैंगो सिटी', विदेशों तक भेजे जाते हैं यहां के आम

पश्चिम बंगाल का मालदा शहर मैंगो सिटी के नाम से प्रसिद्ध है, जहां बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले आम उगाए जाते हैं और यह क्षेत्र आम व्यापार का प्रमुख केंद्र है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी लोकप्रियता देश के हर कोने में देखने को मिलती है. गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आम की खुशबू फैल जाती है और लोग अलग-अलग किस्मों का स्वाद लेने के लिए उत्साहित रहते हैं. इसी खास पहचान के कारण देश के कुछ शहर आम उत्पादन के लिए मशहूर हो गए हैं.

भारत में 'मैंगो सिटी' के नाम से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध शहर मालदा है, जो पश्चिम बंगाल में स्थित है. यह शहर अपने बड़े पैमाने पर आम उत्पादन और उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के लिए जाना जाता है. यहां की जलवायु और मिट्टी आम की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है, जिसके कारण यहां हर साल बड़ी मात्रा में आम पैदा होता है.

कहां-कहां जाते हैं फल?

मालदा जिले में उगाए जाने वाले आम न सिर्फ भारत के विभिन्न राज्यों में भेजे जाते हैं, बल्कि विदेशों में भी इनकी अच्छी मांग है. यहां के किसान पीढ़ियों से आम की खेती करते आ रहे हैं और उन्होंने इस क्षेत्र में खास अनुभव हासिल कर लिया है. यही वजह है कि यहां की उपज की गुणवत्ता लगातार बेहतर बनी रहती है.

कितने किस्मों के उगाए जाते हैं आम?

मालदा में कई प्रसिद्ध किस्मों के आम उगाए जाते हैं, जिनमें हिमसागर, लंगड़ा, फजली और लक्ष्मणभोग प्रमुख हैं. इन आमों की खासियत उनका मीठा स्वाद, सुगंध और रस से भरपूर बनावट है. खासकर हिमसागर और फजली आम देशभर में काफी लोकप्रिय हैं.

अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ता है इसका असर?

आम की खेती इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का भी एक अहम हिस्सा है. हजारों किसान इस पर निर्भर हैं और आम के सीजन में व्यापार काफी तेजी पकड़ लेता है. आम की पैकिंग, ट्रांसपोर्ट और निर्यात से जुड़े कई लोगों को रोजगार मिलता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है.

आमतौर पर यहां आम का सीजन अप्रैल से जुलाई तक चलता है. इस दौरान बाजारों में ताजे आमों की भरमार रहती है और व्यापारी बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त करते हैं. हालांकि कुछ लोग तमिलनाडु के सेलम को भी आम उत्पादन के कारण पहचान देते हैं लेकिन मैंगो सिटी का खिताब मुख्य रूप से मालदा को ही दिया जाता है.

मालदा सिर्फ आम उत्पादन का केंद्र नहीं है, बल्कि यह शहर हजारों किसानों की आजीविका का आधार भी है और भारत की आम संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है.