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India Daily

भारत बना मेटाबॉलिक बीमारियों का नया केंद्र, डायबिटीज में चीन को पीछे छोड़ बना नंबर-1; क्या आप भी हैं खतरे में?

भारत में मेटाबॉलिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. स्टडी के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज और उससे जुड़ी मौतों के मामले में भारत अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर पहुंच गया है.

KanhaiyaaZee
भारत बना मेटाबॉलिक बीमारियों का नया केंद्र, डायबिटीज में चीन को पीछे छोड़ बना नंबर-1; क्या आप भी हैं खतरे में?
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: भारत के लिए स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक बेहद डरावनी खबर सामने आई है. 11 देशों के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन से पता चला है कि भारत अब टाइप 2 डायबिटीज का नया वैश्विक केंद्र बन गया है. कुछ दशक पहले तक इस सूची में चीन सबसे ऊपर हुआ करता था, लेकिन अब जीवनशैली में बदलाव की वजह से स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. मेटाबॉलिक बीमारियों का यह बढ़ता बोझ न केवल हमारी अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है, बल्कि लाखों परिवारों की खुशियां भी छीन रहा है.

1990 में टाइप 2 डायबिटीज के सबसे अधिक मामले चीन में थे और भारत दूसरे स्थान पर था. लेकिन 2023 के आंकड़े बताते हैं कि भारत अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले नंबर पर आ गया है. यह विश्लेषण 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज' के डेटा पर आधारित है. स्टडी के अनुसार, भारत और चीन पर टाइप 2 डायबिटीज, हाई बीपी, हाई बीएमआई, खराब कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसी पांच गंभीर मेटाबॉलिक बीमारियों का सबसे भारी बोझ है. शोधकर्ताओं ने 11 देशों के आंकड़ों का गहन अध्ययन किया है.

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ? 

अध्ययन के लेखक अनूप मिश्रा का कहना है कि टाइप 2 डायबिटीज से होने वाली मौतों के मामले में भारत शीर्ष पर है. हालांकि अन्य बीमारियों में चीन आगे है, लेकिन भारत का दूसरे स्थान पर होना चिंताजनक है. 2023 में अकेले डायबिटीज की वजह से देश में 2.1 करोड़ से ज्यादा मामले और लगभग 5.8 लाख मौतें दर्ज की गईं. यह डरावने आंकड़े बताते हैं कि देश की एक बड़ी आबादी इस साइलेंट किलर की चपेट में है, जिसे तुरंत रोकने की जरूरत है.

जीवनशैली और बीमारियों का रिश्ता 

विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी और फैटी लिवर जैसी समस्याएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं. इनका मुख्य कारण खराब खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी है. अगर इन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो ये बीमारियां भविष्य में किडनी फेल होना, हार्ट अटैक, लिवर की गंभीर समस्या, लकवा और कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों का आधार बन जाती हैं. आधुनिक जीवनशैली और फास्ट फूड का अधिक सेवन इस संकट को और अधिक गहरा बना रहा है.

आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 2023 में भारत में टाइप 2 डायबिटीज के 2,13,45,118 मामले और 5,78,367 मौतें दर्ज की गईं. वहीं चीन में यह संख्या क्रमशः 1,09,40,382 और 1,72,911 रही. पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डायबिटीज के लगभग 4.9 करोड़ मरीजों में से 54.1 प्रतिशत पुरुष हैं. इस क्षेत्र में हाई बीपी सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है, जिससे 62.7 लाख मौतें हुई हैं. यह अंतर भारत की कमजोर पड़ती स्वास्थ्य सुरक्षा और बिगड़ती आदतों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.

2030 तक गहरा सकता है संकट 

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि 1990 से 2023 के बीच इन बीमारियों के बोझ में 1.7 से 3.7 गुना तक की भारी वृद्धि हुई है. अनुमान है कि 2030 तक यह स्थिति और भी विकराल हो जाएगी. हाई बीपी आने वाले समय में भी मौत का सबसे बड़ा कारण बना रहेगा. ऐसे में सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में बदलाव और लोगों में जागरूकता लाना अब अनिवार्य हो गया है. स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम ही हमें इस भविष्य के संकट से बचा सकते हैं.