menu-icon
India Daily

स्पेस स्टेशन के अंदर मल-मूत्र और उल्टी का क्या करते हैं एस्ट्रोनॉट्स? नासा ने जो बताया सुनकर यकीन नहीं करेंगे

जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से पृथ्वी की ओर निहारते हैं, तो अंतरिक्ष की अनंतता के बीच एक बुनियादी, फिर भी जटिल चुनौती उनके सामने होती है अपशिष्ट प्रबंधन.

garima
Edited By: Garima Singh
स्पेस स्टेशन के अंदर मल-मूत्र और उल्टी का क्या करते हैं एस्ट्रोनॉट्स? नासा ने जो बताया सुनकर यकीन नहीं करेंगे
Courtesy: x

Space waste management: जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से पृथ्वी की ओर निहारते हैं, तो अंतरिक्ष की अनंतता के बीच एक बुनियादी, फिर भी जटिल चुनौती उनके सामने होती है अपशिष्ट प्रबंधन. अंतरिक्ष में संसाधनों की कमी के कारण, अपशिष्ट को संभालने का तरीका न केवल तकनीकी कौशल का प्रदर्शन है, बल्कि मानव जीवन की निरंतरता का आधार भी है. “पसीने और मूत्र से बना पानी पीना पृथ्वी पर अटपटा लग सकता है, लेकिन अंतरिक्ष में यह रोज़मर्रा की ज़िंदगी है,”

अंतरिक्ष में पानी की एक-एक बूंद अनमोल है. पृथ्वी से सीमित आपूर्ति और अंतरिक्ष में जल स्रोतों की अनुपस्थिति के कारण, जल संरक्षण एक अनिवार्य आवश्यकता है. इस चुनौती से निपटने के लिए, नासा ने आईएसएस पर एक अत्याधुनिक जल पुनर्प्राप्ति प्रणाली (डब्ल्यूआरएस) स्थापित की है. यह प्रणाली अंतरिक्ष यात्रियों के मूत्र, पसीने और उनकी सांसों से निकलने वाली नमी को एकत्रित कर उसे शुद्ध करती है. यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल और बहुस्तरीय है. इसमें अनेक फिल्टर, रासायनिक उपचार और शुद्धिकरण इकाइयाँ शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि पुनर्नवीनीकृत पानी पूरी तरह से सुरक्षित और पीने योग्य हो. नासा का दावा है कि “आईएसएस पर पुनर्नवीनीकृत पानी अक्सर पृथ्वी पर उपलब्ध कई जल स्रोतों से कहीं अधिक शुद्ध होता है.” यह तकनीक अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जीवन रक्षक सिद्ध हुई है, जो सीमित संसाधनों के बीच दीर्घकालिक मिशन को संभव बनाती है.

ठोस अपशिष्ट: एक अनसुलझी चुनौती

हालांकि जल पुनर्चक्रण में तकनीकी प्रगति ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, मानव मल का प्रबंधन अभी भी एक जटिल मुद्दा है. आम धारणा के विपरीत, ठोस मल को रिसाइकिल नहीं किया जाता. इसे विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए सीलबंद प्लास्टिक बैग में एकत्र किया जाता है और आईएसएस के एक विशेष भंडारण क्षेत्र में रखा जाता है. हर 30 से 90 दिनों में, जब कार्गो अंतरिक्ष यान ताज़ा आपूर्ति लेकर आईएसएस पहुँचता है, तो यह कचरे से भरे बैग को वापस ले जाता है. इन यानों को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान जानबूझकर जलने के लिए निर्देशित किया जाता है, जिससे अपशिष्ट राख में बदल जाता है. यह भस्मीकरण प्रक्रिया वर्तमान में आईएसएस पर अपशिष्ट निपटान का सबसे प्रभावी तरीका है.

अंतरिक्ष में जीवन: तकनीक और अनुशासन का संगम

अंतरिक्ष में अपशिष्ट प्रबंधन केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि अनुशासन और संसाधन प्रबंधन का प्रतीक है. शुभांशु शुक्ला जैसे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए, यह प्रक्रिया अंतरिक्ष मिशन की सफलता और उनकी सुरक्षा का आधार है. जैसे-जैसे अंतरिक्ष अन्वेषण के नए द्वार खुल रहे हैं, अपशिष्ट प्रबंधन की तकनीकों में और प्रगति की उम्मीद है, जो भविष्य में मंगल और उससे आगे के मिशनों को और अधिक टिकाऊ बनाएगी.