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ट्रंप ने पैसा देना किया बंद, दुनियाभर में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रहीं संयुक्त राष्ट्र एंजेंसियां

अमेरिका द्वारा वित्तीय सहायता में कटौती का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि वैश्विक मीजल्स और रूबेला लैब नेटवर्क "कपास होने के खतरे में है", क्योंकि यह पूरी तरह से अमेरिका द्वारा वित्त पोषित किया जाता था, जिसे 8 मिलियन डॉलर वार्षिक सहायता मिलती थी.

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Mayank Tiwari

अमेरिका वैश्विक स्तर पर मानवीय मदद प्रदान करने वाला सबसे बड़ा देश है. हालांकि कुछ अन्य देश अपने बजट का बड़ा हिस्सा इस पर खर्च करते हैं. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित वित्तीय सहायता में कटौती ने कई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों को अपने कर्मचारियों को बर्खास्त करने, कार्यवाहियों को स्थगित करने और अफगानिस्तान, सूडान और यूक्रेन जैसे देशों में सेवाओं को रोकने के लिए मजबूर कर दिया है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि अफगानिस्तान में 9 मिलियन से ज्यादा लोग स्वास्थ्य और सुरक्षा सेवाओं से वंचित हो जाएंगे. इसके अलावा, यूक्रेन में 2024 में एक मिलियन लोगों को दी जाने वाली नकद मदद को भी रोक दिया गया है और सूडान में पलायन कर रहे लोगों के लिए कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता समाप्त हो चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों की संघर्षपूर्ण स्थिति

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां अब अपनी कार्यवाहियों को फिर से बदलाव करने, रणनीतिक कटौती करने, अन्य स्रोतों से फाइनेंशियल मदद पाने और अमेरिकी प्रशासन से सहयोग बहाल करने की अपील करने में जुटी हैं. कुछ एजेंसियों को उम्मीद है कि संघीय अदालतों के फैसले से अमेरिकी विदेश सहायता के कुछ हिस्से की पुनः प्राप्ति हो सकेगी.

स्वतंत्र एनजीओ और शरणार्थी एजेंसियों पर प्रभाव

कई स्वतंत्र एनजीओ ने भी परियोजनाओं को बंद करने की सूचना दी है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR) ने एपी को बताया कि अमेरिकी फाइनेंशियल मदद में रुकावट ने उनकी कार्यवाहियों को प्रभावित किया है और “पहले लागत बचाने के प्रयास” के रूप में 300 मिलियन डॉलर की योजनाओं में कटौती की जाएगी. पिछले साल UNHCR को अपने लगभग 5 बिलियन डॉलर के बजट का 40% से अधिक अमेरिका से प्राप्त हुआ था.

इसके अलावा, UNHCR के साझेदार संगठनों ने कुछ गतिविधियों को रोक दिया है, जिसके कारण मध्य अफ्रीकी गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान में लगभग 1.8 लाख महिलाओं और लड़कियों के लिए सेवाएं रद्द कर दी गई हैं. इथियोपिया में भी 2 लाख महिलाओं और लड़कियों पर इसका असर पड़ेगा. UNHCR के प्रवक्ता मैथ्यू सॉल्टमार्श ने कहा,'यदि शीघ्र नई फाइनेंशियल मदद प्राप्त नहीं होती है, तो जीवन रक्षक सहायता में और कटौती अनिवार्य होगी.

स्वास्थ्य और अन्य एजेंसियों पर प्रभाव

अमेरिका द्वारा वित्तीय सहायता में कटौती का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि वैश्विक मीजल्स और रूबेला लैब नेटवर्क "कपास होने के खतरे में है", क्योंकि यह पूरी तरह से अमेरिका द्वारा वित्त पोषित किया जाता था, जिसे 8 मिलियन डॉलर वार्षिक सहायता मिलती थी.

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र की एचआईवी/एड्स से लड़ाई एजेंसी ने बताया कि उसने एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी प्रदान करने वाले ड्रॉप-इन केंद्र और सेवा बिंदुओं को बंद कर दिया है. इसका असर हैती के 7.5 लाख लोगों पर पड़ेगा, और अमेरिका द्वारा वित्त पोषित 181 साइटों में से 70% बंद हो गई हैं.

आपातकालीन फंड्स का इस्तेमाल

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के कार्यालय ने कहा कि वह अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में कम वित्त पोषित संकटों को संबोधित करने के लिए अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया निधि से 110 मिलियन डॉलर का उपयोग कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मानवीय प्रमुख टॉम फ्लेचर ने कहा कि उन्होंने साझेदारों से उन इलाकों की लिस्ट देने का अनुरोध किया है, जहां वे फाइनेंशियल मदद के अभाव में कटौती कर रहे हैं.