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इस देश के PM ने विपक्ष के नेता को पद से हटाया, जानें किस गलती की सुनाई इतनी बड़ी सजा?

सिंगापुर की संसद में वोटिंग के बाद विपक्ष के नेता प्रीतम सिंह को पद से हटा दिया गया. संसदीय समिति के सामने शपथ लेकर झूठ बोलने के दोष में यह कार्रवाई हुई, जिससे देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: सिंगापुर की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया, जब संसद में हुई वोटिंग के बाद विपक्ष के नेता प्रीतम सिंह से उनका पद छीन लिया गया. सत्तारूढ़ पीपल्स एक्शन पार्टी के वर्चस्व वाली संसद ने यह फैसला संसदीय समिति के सामने शपथ लेकर झूठ बोलने के मामले में दोषसिद्धि के बाद लिया. हालांकि सिंह संसद सदस्य बने रहेंगे, लेकिन उनकी भूमिका और अधिकार अब काफी सीमित हो गए हैं.

बुधवार को सिंगापुर की संसद में तीन घंटे तक चली तीखी बहस के बाद एक प्रस्ताव पारित किया गया. इसमें सहमति बनी कि प्रीतम सिंह को विपक्ष के नेता के पद पर बने रहना नहीं चाहिए. वर्कर्स पार्टी के सभी 11 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया, लेकिन बहुमत के आगे उनकी एक न चली. इसके साथ ही संसद ने वर्कर्स पार्टी के दो अन्य सांसदों के मामलों की समीक्षा पर भी सहमति जताई.

पद गया, लेकिन सांसद बने रहेंगे

पद से हटाए जाने के बावजूद प्रीतम सिंह संसद सदस्य और वर्कर्स पार्टी के महासचिव बने रहेंगे. हालांकि अब उन्हें विपक्ष के नेता के तौर पर मिलने वाले अतिरिक्त भत्ते नहीं मिलेंगे. संसद में बहस के दौरान सरकार की ओर से दिए जाने वाले बयानों पर सबसे पहले जवाब देने का अधिकार भी उनसे छिन गया है. यह बदलाव उनकी राजनीतिक हैसियत को सीधे तौर पर प्रभावित करता है.

सरकार और प्रधानमंत्री का रुख

गुरुवार को प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने साफ कहा कि दोषसिद्धि और संसद की वोटिंग के बाद प्रीतम सिंह का विपक्ष के नेता बने रहना अब संभव नहीं है. उन्होंने वर्कर्स पार्टी को इस पद के लिए अपने किसी अन्य सांसद को नामित करने का निमंत्रण भी दिया. वर्कर्स पार्टी ने कहा है कि वह इस फैसले पर विचार करेगी और उचित समय पर अपना रुख साफ करेगी.

पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ?

यह मामला साल 2021 से जुड़ा है, जब वर्कर्स पार्टी की सांसद रईसा खान ने संसद में दावा किया था कि उन्होंने एक यौन उत्पीड़न पीड़िता के साथ पुलिस को दुर्व्यवहार करते देखा. बाद में खान ने स्वीकार किया कि यह बयान झूठा था. संसदीय समिति की जांच में उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें प्रीतम सिंह भी शामिल थे, ने सच जानते हुए भी उन्हें कहानी जारी रखने को कहा.

रईसा खान ने बाद में पार्टी और संसद से इस्तीफा दे दिया और उन पर जुर्माना लगाया गया. इसी मामले की सुनवाई के दौरान संसदीय समिति के सामने शपथ लेकर झूठ बोलने के आरोप में प्रीतम सिंह के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हुआ. फरवरी में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और जुर्माना लगाया. अदालत ने कहा कि उनके आचरण से संकेत मिलता है कि वह सच सामने नहीं आने देना चाहते थे. सिंह ने अपनी बेगुनाही बनाए रखी और कहा कि वह खान को संवेदनशील मुद्दे पर संभलने का समय देना चाहते थे, लेकिन दिसंबर में उनकी अपील भी खारिज हो गई.