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India Daily

मेलबर्न में हिंदू मंदिर पर हमला, एशियाई रेस्टोरेंट की दीवारों पर कर दी गंदी गालियों की बरसात!

मेलबर्न के पूर्वी उपनगर बोरोनिया में वाडहर्स्ट ड्राइव पर स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर को लाल रंग से रंगकर नस्लवादी गालियां लिखी गईं. फिलहाल, मामले की जांच-पड़ताल जारी है, और समुदाय एकजुट होकर इस घृणा का जवाब देने की तैयारी में है.

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Edited By: Mayank Tiwari
मेलबर्न में हिंदू मंदिर पर हमला, एशियाई रेस्टोरेंट की दीवारों पर कर दी गंदी गालियों की बरसात!
Courtesy: Social Media

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एक हिंदू मंदिर और दो एशियाई रेस्तरां पर नस्लवादी भित्तिचित्रों से हमला किया गया, जिससे स्थानीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है. गुरुवार (24 जुलाई) को एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार सुबह मेलबर्न के पूर्वी उपनगर बोरोनिया में वाधर्स्ट ड्राइव पर स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर को लाल रंग के नस्लवादी अपशब्दों से अपवित्र किया गया.

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि उसी दिन बोरोनिया रोड पर स्थित दो रेस्तरां पर भी वही नस्लवादी अपशब्द लिखे गए. ये हमले समुदाय के लिए गहरे आघात का कारण बने हैं.  इसमें कहा गया है कि बोरोनिया रोड पर स्थित दो रेस्तरां पर भी उसी दिन एक ही तरह के अपशब्द लिखे गए.

पुलिस और सरकार ने दी प्रतिक्रिया

विक्टोरिया पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, "हमारे समाज में नफरत-आधारित और नस्लवादी व्यवहार के लिए बिल्कुल भी स्थान नहीं है." विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने मंदिर प्रबंधन को निजी संदेश में हमले को "घृणित" और "नस्लवादी" बताया. उनके संदेश में कहा गया, "इस सप्ताह जो हुआ, वह घृणित, नस्लवादी और अत्यंत परेशान करने वाला था. यह केवल तोड़फोड़ नहीं थी, यह घृणा का जानबूझकर किया गया कृत्य था, जिसका उद्देश्य डराना, अलग-थलग करना और भय फैलाना था.

समुदाय ने बयां किया अपना दर्द

हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया, विक्टोरिया चैप्टर के अध्यक्ष मकरंद भगवत ने इस घटना पर स्तब्धता जताते हुए कहा, "यह हमारी पहचान, पूजा के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला लगता है." हिंदू समुदाय ने इस घटना के बाद अंतर-धार्मिक समूहों से समर्थन की अपील की है.

तेजी से बढ़ते नस्लवादी हमले

इसके अलावा रिपोर्ट में ये भी जिक्र किया गया है कि यह हमला मेलबर्न में टारगेटेड नफरत की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोत्तरी का संकेत देता है. ये घटनाएं न केवल हिंदू समुदाय, बल्कि पूरे बहुसांस्कृतिक समाज के लिए खतरे की घंटी हैं. समुदाय अब एकजुट होकर नस्लवाद के खिलाफ आवाज उठा रहा है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदमों की मांग कर रहा है.