बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का दर्द सामने आया है. क्रिसमस के मौके पर दिए गए अपने विशेष संदेश में उन्होंने देश की मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. शेख हसीना ने कहा कि वर्तमान सरकार अवैध तरीके से सत्ता में आई है और वह सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने विश्वास के अनुसार जीने की आजादी से वंचित कर रही है.
अपने बयान में शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में विशेष रूप से गैर-मुसलमानों पर अत्याचार बढ़ गया है. उन्होंने दावा किया कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ ऐसी हिंसक घटनाएं हो रही हैं, जिनमें लोगों को जिंदा जलाने तक की घटनाएं शामिल हैं. शेख हसीना ने इसे मानवता के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि यह देश को अंधकार की ओर ले जाने वाला रास्ता है.
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि बांग्लादेश की जनता इस भयावह दौर को ज्यादा समय तक चलने नहीं देगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि आम लोग एकजुट होकर देश में शांति, सहिष्णुता और इंसानियत को फिर से स्थापित करेंगे.
Message of the Honorable Prime Minister and President of the Bangladesh Awami League, Bangabandhu’s daughter Sheikh Hasina, on the occasion of Christmas
— Bangladesh Awami League (@albd1971) December 25, 2025
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Today, 25 December, on the occasion of Christmas, the greatest religious festival of the Christian community, I extend my… pic.twitter.com/cvjUoGaIhH
25 दिसंबर को ईसाई समुदाय के सबसे बड़े त्योहार क्रिसमस के अवसर पर शेख हसीना ने दुनिया भर के ईसाइयों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि ईसा मसीह मानवता की मुक्ति के दूत थे, जिन्होंने सत्य, न्याय और करुणा का संदेश दिया. उनके बलिदान और विचारों ने दुनिया को अधिक मानवीय और शांतिपूर्ण बनाने की प्रेरणा दी.
इस बीच बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. गुरुवार को राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपज़िला में एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. मृतक की पहचान अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, घटना रात करीब 11 बजे होसेनडांगा गांव में हुई. आरोप है कि युवक पर जबरन वसूली का शक जताया गया था, जिसके बाद भीड़ ने हमला कर दिया.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. हालांकि इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.