menu-icon
India Daily

पहली बार बनेगी राज्यसभा, PM का कार्यकाल सिर्फ 10 साल, जानें छात्र विद्रोह के बाद बांग्लादेश की राजनीति में क्या होने जा रहे ऐतिहासिक बदलाव

संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल किया है. पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान अब नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. बीएनपी ने 300 में से 200 से ज्यादा सीटें जीतीं.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
पहली बार बनेगी राज्यसभा, PM का कार्यकाल सिर्फ 10 साल, जानें छात्र विद्रोह के बाद बांग्लादेश की राजनीति में क्या होने जा रहे ऐतिहासिक बदलाव
Courtesy: @bdbnp78

बांग्लादेश के लोगों ने 12 फरवरी 2026 को एक साथ दो काम किए. एक तरफ उन्होंने नई संसद और सरकार चुनी, दूसरी तरफ संविधान में बड़े बदलाव के लिए जनमत संग्रह में हिस्सा लिया. हर वोटर ने दो वोट डाले - एक पार्टी और उम्मीदवार के लिए, दूसरा 'जुलाई चार्टर' नाम के सुधार पैकेज को मंजूरी देने के लिए.

 इस चार्टर को 'नए बांग्लादेश' की नींव कहा जा रहा है. लोगों ने 'हां' में भारी बहुमत दिया. जनमत संग्रह के नतीजे आए तो करीब 68 प्रतिशत लोगों ने 'हां' (YES) में वोट किया. यानी देश की जनता ने संविधान में ये बड़े सुधार चाहे. सिर्फ 32 प्रतिशत ने 'नहीं' कहा. ये बदलाव 2024 के छात्र विद्रोह की मांगों से निकले हैं, जब शेख हसीना की सरकार गिर गई थी. लोग भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और एक व्यक्ति के हाथ में ज्यादा ताकत के खिलाफ थे.

बीएनपी की बड़ी जीत

बता दें कि संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी बहुमत हासिल किया है. पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान अब नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. बीएनपी ने 300 में से 200 से ज्यादा सीटें जीतीं. ये 2024 के बाद पहला बड़ा चुनाव था, जिसमें बीएनपी सत्ता में लौटी. 

क्या-क्या बड़े बदलाव होंगे?

अभी बांग्लादेश में सिर्फ एक सदन है (जातीय संसद). अब ऊपरी सदन (जैसे भारत की राज्यसभा) बनेगा, जिसमें 100 सदस्य होंगे. ये सदस्य पार्टियों को मिले वोट के हिसाब से मिलेंगे. संविधान बदलने के लिए दोनों सदनों की मंजूरी जरूरी होगी. इससे कोई एक पार्टी अकेले सब कुछ नहीं बदल पाएगी.

प्रधानमंत्री का कार्यकाल सीमित

अब बांग्लादेश में कोई व्यक्ति जिंदगी में कुल 10 साल से ज्यादा पीएम नहीं रह सकेगा. साथ ही पीएम रहते हुए पार्टी का अध्यक्ष भी नहीं बन सकता.

राष्ट्रपति की ताकत बढ़ेगी

राष्ट्रपति अब कई महत्वपूर्ण पदों पर अपने फैसले से नियुक्ति कर सकेंगे, जैसे ह्यूमन राइट्स कमीशन, बैंक गवर्नर आदि. पहले यह सब पीएम की सलाह पर ही होता था.

सांसद पार्टी से अलग वोट दे सकेंगे

पुराना नियम (आर्टिकल 70) खत्म होगा. अब सांसद पार्टी की लाइन के खिलाफ भी वोट कर सकेंगे, यानी अपनी विवेक से फैसला ले सकेंगे.

आपातकाल लगाना मुश्किल होगा

आपातकाल सिर्फ पीएम की मर्जी से नहीं लगेगा. कैबिनेट, विपक्ष के नेता की सहमति जरूरी होगी. आपातकाल में बुनियादी अधिकार भी नहीं छीने जा सकेंगे.

महिलाओं को ज्यादा जगह

संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ेगा. चुनाव आयोग को पूरी आजादी मिलेगी और पुरानी केयरटेकर सरकार की व्यवस्था वापस आएगी.

नई संसद एक संवैधानिक परिषद की तरह काम करेगी. 180 दिनों के अंदर ये सुधार लागू करने हैं. ये बदलाव बांग्लादेश को ज्यादा लोकतांत्रिक, संतुलित और सत्ता के दुरुपयोग से मुक्त बनाने की कोशिश हैं. वहीं तारिक रहमान के सामने अब ये सुधार लागू करने की बड़ी जिम्मेदारी है. देश में नई उम्मीद जगी है कि पुरानी समस्याएं खत्म होंगी.