इस लड़की ने तय कर लिया अपनी मौत का समय, जानिए क्या है इसकी वजह
Which Countries Have Law For Euthanasia: दुनिया में ऐसे बहुत से देश हैं जहां इच्छा मृत्यु को लेकर कानून बनाया गया है. एक ऐसा ही देश है जहां एक लड़की ने अपनी मौत की तारीख तय कर ली है. अगले महीने वह पृथ्वी को अलविदा कह देगी.
Which Countries Have Law For Euthanasia: कहते हैं हमारे जन्म और हमारी मृत्यु का निश्चय ईश्वर ही करता है. बिना उसकी इजाजत के एक भी पत्ता नहीं हिलता है. लेकिन मानव सभ्यता ने अपने बुद्धि, विवेक और बल से खुद का इतना विकास कर लिया है कि वह खुद से ही अपने भविष्य का निर्धारण कर सकता है. इंसान की प्रकृति पर विजय पाने की चाहत में इंसान हजारों सालों से कोशिश में लगा हुआ है. वैज्ञानिक मौत को मात देने के लिए तरह-तरह के शोध कर रहे हैं वहीं, कुछ लोग खुद को इस संसार से अलविदा कहना चाहते है. बहुत से देशों में तो इच्छा मृत्यु के लिए भी कानून बना हुआ है. इच्छा मृत्यु पर कानून बनाने वाला नीदरलैंड पहला देश है. अब इस कानून का इस्तेमाल करके एक लड़की ने अपनी मौत की तारीख तय कर ली है.
खुद की मौत की तारीख तय करना कितना डरावना प्रतीत होता है. लेकिन इंसानों के जीवन में अनेकों तरह की समस्याएं होती हैं जो इंसान को जीते-जीते मौत का एहसास दिला देती है. इन दुखों से दुखी होकर बहुत से लोग मरना पसंद कर लेते हैं. इसलिए नीदरलैंड की 28 साल की जोराया टेर बीक (Zoraya ter Beek) ने भी खुद को ईश्वर के हवाले सौंपने का डिसीजन लिया है.
मई में दुनिया को कह देंगी अलविदा
दरअसल, जोराया टेर बीक ऐसी मानसिक बीमारी से पीड़ित है जो उसका साथ शायद कभी न छोड़ें. वो डिप्रेशन, ऑटिज्म और बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से ग्रस्त है. डॉक्टरों ने भी हार मान ली है. उनका कहना है कि जोराया की बीमारी कभी ठीक नहीं की जा सकती है. इसीलिए जोराया ने अपनी जिंदगी का द एंड करने का निर्णय लिया है. मई में डॉक्टर 28 साल की जोराया टेर बीक को दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्त कर देंगे. जोराया ने मौत अपनी इच्छा से चुनी है. क्योंकि न्यूजीलैंड का कानून इच्छामृत्यु का अधिकार देता है. उसने कहा कि मौत के बाद उसके शव को दफनाने की बजाय जला दिया जाए ताकि उसके बॉयफ्रेंड को उसकी कब्र देखकर उसकी याद न आए.
इन देशों में वैध है इच्छा मृत्यु
नीदरलैंड: नीदरलैंड दुनिया का पहला देश है जिसने इच्छा मृत्यु को कानूनी वैधता दी है. साल 2001 में नीदलैंड ने इच्छा मृत्यु का कानून लागू किया था. कानून के मुताबिक उन व्यक्तियों को इच्छा मृत्यु दी जा सकती है जिनके जीने की संभावना कम है. गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं. इच्छा मृत्यु के लिए यहां डॉक्टर से अपनी बीमारी के इलाज का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है. डॉक्टर दूसरे डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही सर्टिफिकेट जारी कर सकता है. 2022 में नीदलैंड में 5 फीसदी लोगों ने इच्छा मृत्यु के तहत दुनिया को अलविदा कहा था.
बेल्जियम: बेल्जियम ने साल 2022 में इच्छा मृत्यु को कानूनी वैधता दी. कानून के तहत डॉक्टर उन रोगियों को उनका जीवन समाप्त करने में मदद कर सकते हैं जिनके जीने सी संभावना कम है.
लक्जमबर्ग: इस देश ने साल 2009 में इच्छा मृत्यु को कानूनी वैधता दी थी. लक्जमबर्ग के इच्छा मृत्यु में वो शर्तें हैं जो बेल्जियम और नीदरलैंड के इच्छा मृत्यु में हैं.
कनाडा- साल 2016 में कनाडा ने इच्छा मृत्यु के लिए चिकित्सीय सहायता लेने को वैध करारा दिया था. इसके तहत गंभीर रोगी जिनके जिंदा रहने के चांसेस बहुत कम हैं वो चिकित्सीय सहायता से इच्छा मृत्यु को प्राप्त हो सकते हैं. 2021 में कानून में बदलाव करके उन लोगों को इसके दायरे में ला दिया गया था जो बीमारी की वजह से मर नहीं सकते हैं लेकिन उनकी बीमारी जीवन भर उनके साथ चलेगी. ऐसे में अगर व्यक्ति चाहे तो इच्छा मृत्यु के तहत दुनिया का अलविदा कह सकता है.
स्पेन: साल 2021 में स्पेन ने उन रोगियों के लिए इच्छा मृत्यु को वैध माना जो गंभीर बीमारी से ग्रस्त हों और उन्हें असहनीय पीड़ा होती हो. पीड़ित का इच्छा मृत्यु का अनुरोध उचित है या नहीं इसकी समीक्षा डॉक्टरों की टीम द्वारा किया जाएगा जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ही इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाती है.
कोलंबिया: कोलंबिया में कोई बीमार या असहनीय पीड़ा वाले रोगी अदालत के जरिए इच्छा मृत्यु प्राप्त कर सकते हैं. यहां इच्छा मृत्यु देने के लिए कई तरह की गाइडलाइन बनाई गई हैं.
न्यूजीलैंड: साल 2021 में न्यूजीलैंड ने भी इच्छा मृत्यु को वैध करार दिया. इस कानून को एक जनमत संग्रह के बाद मान्यता दी गई थी. गंभीर बीमार और असहनीय पीड़ा वाले मरीज जिनकी कुछ महीनों में मौत निश्चित हो उन्हें इच्छा मृत्यु दी जा सकती है.
इंडिया: बात अगर अपने देश भारत की करें तो भारत में सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में इच्छामृत्यु की मंजूरी देते हुए कहा था कि लोगों को सम्मान से मौत पाने का पूरा हक है. हालांकि, ये इच्छा मृत्यु परोक्ष इच्छामृत्यु है. यानी अगर आप गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं आपके बचने की संभावना नहीं है तो आपका इलाज बंद कर दिया जाएगा.