अमेरिका-ईरान में युद्ध फाइनल! राष्ट्रपति ट्रंप ने मुस्लिम देश की ओर रवाना किया विश्व का सबसे बड़ा युद्धपोत
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ता दिखाई दे रहा है. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ नई बातचीत की संभावना जताई थी. हालांकि, ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क और संदेशों के आदान-प्रदान के बावजूद वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई.
नई दिल्ली: अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत को मध्य पूर्व में और मजबूत करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को वहां भेजने का फैसला किया है. यह पोत पहले से क्षेत्र में तैनात USS Abraham Lincoln को सहयोग देगा.
अमेरिका के इस कदम से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में उसकी सैन्य मौजूदगी और दबदबा काफी बढ़ जाएगा. माना जा रहा है कि इससे अमेरिका की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी और क्षेत्रीय मामलों में उसका प्रभाव बढ़ेगा.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ता दिखाई दे रहा है. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ नई बातचीत की संभावना जताई थी. हालांकि, ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क और संदेशों के आदान-प्रदान के बावजूद वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई. उधर कई अरब देशों ने भी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तो पूरा क्षेत्र बड़े संघर्ष में फंस सकता है. पहले से ही गाजा में चल रहे युद्ध के कारण मध्य पूर्व की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है.
दुनिया का सबसे उन्नत विमानवाहक पोत
USS Gerald R. Ford को दुनिया का सबसे उन्नत विमानवाहक पोत माना जाता है. यह अत्याधुनिक तकनीक, शक्तिशाली हथियारों और आधुनिक विमान संचालन प्रणाली से लैस है. यह पोत कैरिबियन क्षेत्र से सीधे मध्य पूर्व की ओर रवाना किया जा रहा है. इससे पहले इसे वेनेजुएला के पास तैनात किया गया था, जहां अमेरिका ने वहां की सरकार पर दबाव बनाने के लिए सैन्य उपस्थिति बढ़ाई थी. यह युद्धपोत जून 2025 से लगातार समुद्र में तैनात है, जिससे इसके चालक दल के सदस्यों की ड्यूटी अवधि आठ महीने से भी अधिक हो चुकी है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने दी धमकी
अब यह पोत पर्शियन गल्फ क्षेत्र में मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ मिलकर काम करेगा. इस क्षेत्र में पहले से ही अमेरिकी गाइडेड मिसाइल युद्धपोत, लड़ाकू विमान और निगरानी विमान तैनात हैं. लगभग 4,500 से अधिक सैनिकों और अधिकारियों के साथ यह विशाल विमानवाहक पोत अमेरिका की समुद्री शक्ति का प्रतीक माना जाता है. इसकी तैनाती को ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि यदि परमाणु समझौते पर सहमति नहीं बनी तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
ईरान में तनावपूर्ण हालात
दूसरी ओर ईरान के अंदर भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. हाल के महीनों में देशभर में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें बलपूर्वक दबा दिया गया. इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जिसके बाद देश में शोक सभाएं और विरोध कार्यक्रम जारी हैं. अलग-अलग शहरों में लोग मृतकों की याद में इकट्ठा हो रहे हैं और सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ती दिख रही है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंतरिक असंतोष और बाहरी दबाव दोनों बढ़ते रहे तो आने वाले समय में क्षेत्र की स्थिति और अस्थिर हो सकती है.
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