भारत के सबसे वांछित आतंकियों में शामिल अब्दुल अजीज, जो लश्कर-ए-तैयबा के लिए वित्तीय और रणनीतिक ऑपरेशनों का प्रमुख संयोजक था, पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित एक अस्पताल में दम तोड़ गया. खुफिया सूत्रों के अनुसार, अजीज को 6 मई को भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत किए गए एक सटीक मिसाइल हमले में गंभीर रूप से घायल किया गया था. उसके अंतिम संस्कार के दौरान लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी और अब्दुर रऊफ जैसे शीर्ष नेता भी मौजूद थे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की आतंकवाद के खिलाफ चल रही रणनीतिक कार्रवाई में अब्दुल अजीज की मौत को बड़ी सफलता के तौर पर माना जा रहा है. अजीज ने 2001 के संसद हमले और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों में प्रमुख भूमिका निभाई थी. हालांकि वह सीधे इन हमलों की योजना का हिस्सा नहीं था, लेकिन उसने इनके लिए फंडिंग, हथियारों की आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स में अहम योगदान दिया.
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, अजीज ने खाड़ी देशों, ब्रिटेन और अमेरिका में बसे पाकिस्तानी समुदायों और कट्टरपंथी इस्लामी समूहों से फंड जुटाकर लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों को संचालित किया. इसके अलावा, वह जम्मू-कश्मीर में स्थानीय आतंकी मॉड्यूल को धन और हथियार उपलब्ध कराता था और युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर उन्हें आतंकवाद की ओर धकेलने में शामिल था.
अजीज की भूमिका 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट में भी संदिग्ध रही थी. इसके साथ ही, उसने समुद्री मार्गों से हथियारों और सैटेलाइट फोन की आपूर्ति कर 26/11 हमले को भी संभव बनाया. उसका नेटवर्क आतंकी भर्ती से लेकर सैन्य उपकरणों की तस्करी तक फैला हुआ था.
उसकी मौत लश्कर-ए-तैयबा के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि वह न केवल आर्थिक स्रोत था, बल्कि संगठन के रणनीतिक नेटवर्क को भी संचालित करता था. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लश्कर की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचेगा.