क्या तेहरान-वाशिंगटन में सुलह करना पाकिस्तान के बसकी बात नहीं? ईरान के सांसद ने इस्लामाबाद की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल
मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर गर्म होती नजर आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं. इसी बीच खबर है कि तेहरान ने वॉशिंगटन को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिससे हालात बदल सकते हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है और इसे कम करने के लिए कई देशों की मदद ली जा रही है. इसी कड़ी में पाकिस्तान भी एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था. इस दौरान इस्लामाबाद में बातचीत के कई दौर हुए, जिनमें दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश की गई, लेकिन अब इस प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं. ईरान के एक वरिष्ठ सांसद ने साफ तौर पर कहा है कि पाकिस्तान इस भूमिका के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है. उनके इस बयान के बाद कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।
क्यों उठे पाकिस्तान पर सवाल?
ईरान के सांसद इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सीधे सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान भले ही एक अच्छा पड़ोसी और दोस्त हो, लेकिन वह निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं बन सकता. रेजाई के मुताबिक पाकिस्तान के अधिकारी अक्सर अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर ही अपनी बात रखते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान कभी भी अमेरिकी नीतियों के खिलाफ खुलकर नहीं बोलता. ऐसे में एक संतुलित बातचीत की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है. इस बयान ने पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है.
कैसे बढ़ा कूटनीतिक तनाव?
इस पूरे मामले के बाद अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है. एक तरफ बातचीत की प्रक्रिया पहले ही धीमी हो चुकी थी, वहीं अब ऐसे बयान आने से स्थिति और जटिल हो गई है. ईरान का मानना है कि मध्यस्थ को पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन अगर वह किसी एक पक्ष की तरफ झुका हुआ नजर आए, तो बातचीत का मकसद ही खत्म हो जाता है. यही वजह है कि अब इस्लामाबाद में चल रही बातचीत पर भी असर पड़ता दिख रहा है.
बातचीत में क्या हुआ अब तक?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में पाकिस्तान के दौरे पर गए थे. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की. इन बैठकों में क्षेत्रीय तनाव को कम करने और शांति की दिशा में कदम बढ़ाने पर चर्चा हुई. इससे पहले अराघची ओमान भी गए थे, जहां उन्होंने समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक ढांचे पर बातचीत की थी. इन दौरों से यह साफ है कि ईरान लगातार समाधान की दिशा में प्रयास कर रहा है.
क्या रुख रहा अमेरिका?
अमेरिका की ओर से भी इस मामले में रुख बदलता नजर आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है तो उसे खुद पहल करनी होगी. इसके साथ ही अमेरिका ने पाकिस्तान में प्रस्तावित एक अहम बैठक को भी रद्द कर दिया. इस फैसले ने कूटनीतिक माहौल को और ठंडा कर दिया। अमेरिका का यह कदम संकेत देता है कि वह बातचीत को लेकर अब ज्यादा सतर्क रुख अपना रहा है.
नया प्रस्ताव क्या है?
इन सब तनावों के बीच एक नई खबर सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य होरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को खत्म करना है. यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर यहां स्थिति सामान्य होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. यही वजह है कि इस प्रस्ताव को काफी अहम माना जा रहा है.
क्या हो सकता है आगे ?
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका इस नए प्रस्ताव पर क्या फैसला लेगा, लेकिन कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं. ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत को फिलहाल टाला जा सकता है और पहले शांति प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा. अगर ऐसा होता है, तो यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा. फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह नया प्रस्ताव दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघला पाएगा या नहीं.