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समंदर में ईरान का ‘तैरता गैस स्टेशन’ बेनकाब, कार्गो लॉन्ड्रिंग से अमेरिका को चकमा, शैडो फ्लीट का बड़ा खेल कैसे चलता है?

समंदर के बीच ईरान के एक गुप्त नेटवर्क का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, तेल टैंकरों के जरिए कार्गो लॉन्ड्रिंग की जा रही थी. यह खेल अमेरिका की नजरों से बचकर चल रहा था, जिससे बड़ा आर्थिक फायदा उठाया जा रहा था.

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma
समंदर में ईरान का ‘तैरता गैस स्टेशन’ बेनकाब, कार्गो लॉन्ड्रिंग से अमेरिका को चकमा, शैडो फ्लीट का बड़ा खेल कैसे चलता है?
Courtesy: Credit: OpenAi

अमेरिका ने हाल ही में हिंद महासागर में ईरान के एक बड़े तेल टैंकर ‘एमटी टिफनी’ को कब्जे में लिया. इस टैंकर पर करीब 1.9 मिलियन बैरल ईरानी तेल लदा हुआ था. जांच में सामने आया कि यह टैंकर पिछले एक साल से लगातार संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था. रिपोर्ट के अनुसार, यह जहाज ईरान और मलेशिया के बीच समुद्री इलाकों में कई बार चक्कर लगा चुका है. इन यात्राओं के दौरान टैंकर पर कार्गो लॉन्ड्रिंग यानी अवैध तरीके से तेल और गैस की खरीद-फरोख्त की जा रही थी.

AIS बंद कर छिपाई जाती थी लोकेशन

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह टैंकर अक्सर एक सीमित समुद्री क्षेत्र में मंडराता रहता था. खास बात यह थी कि जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी AIS को बंद कर देता था. कुछ घंटों या दिनों बाद यह फिर से सिस्टम पर दिखने लगता था. इस तकनीक के जरिए जहाज अपनी असली लोकेशन और गतिविधियों को छिपा लेता था. इससे जांच एजेंसियों के लिए इसकी निगरानी करना मुश्किल हो जाता था.

‘तैरता गैस स्टेशन’ बन गया समुद्री इलाका

विशेषज्ञों का मानना है कि मलेशिया के तट से दूर यह समुद्री इलाका ईरान के लिए ‘तैरते गैस स्टेशन’ की तरह काम कर रहा था. यहां ईरान का गुप्त बेड़ा यानी ‘शैडो फ्लीट’ सक्रिय था. इस बेड़े के जरिए तेल को एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया जाता था. सैटेलाइट तस्वीरों में भी यह गतिविधि साफ नजर आई है, जहां अगस्त 2025 में टिफनी नाम का टैंकर दूसरे जहाज के साथ ट्रांसफर करता दिखा.

EOPL बना अवैध गतिविधियों का केंद्र

यह पूरा इलाका ‘ईस्टर्न आउटर पोर्ट लिमिट’ यानी EOPL के नाम से जाना जाता है. यह सिंगापुर जलडमरूमध्य के पास स्थित एक अहम समुद्री क्षेत्र है. यह जगह अपनी लोकेशन और ढीली निगरानी के कारण अवैध गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन चुकी है. रिपोर्ट के मुताबिक, यहां सैकड़ों जहाज अक्सर मंडराते रहते हैं. यही वजह है कि इस इलाके का इस्तेमाल अवैध ट्रांसफर और व्यापार के लिए आसानी से किया जाता है.

शैडो फ्लीट से ईरान को बड़ा फायदा

ईरान पूरे नेटवर्क के जरिए तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने में सफल रहता है. यह तरीका उसे अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है. ‘शैडो फ्लीट’ के जरिए ईरान को लगातार नकद पैसा मिलता रहता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेटवर्क काफी संगठित और रणनीतिक तरीके से काम करता है.

तेजी से बढ़ रहे शिप-टू-शिप ट्रांसफर

आंकड़ों के मुताबिक, इस इलाके में ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के मामले तेजी से बढ़े हैं. साल 2025 में यहां कम से कम 679 ऐसे ट्रांसफर हुए, जो पिछले सालों के मुकाबले काफी ज्यादा हैं. यह आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि अवैध समुद्री व्यापार तेजी से फैल रहा है. इससे अंतरराष्ट्रीय नियमों और सुरक्षा के लिए भी चुनौती पैदा हो रही है.

मलेशिया ने भी मानी बड़ी चुनौती

मलेशिया सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीर माना है. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, देश ने अपने समुद्री क्षेत्र में हो रहे अवैध ट्रांसफर के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है. विदेश मंत्री ने माना कि यह समस्या अब बड़ी चुनौती बन चुकी है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाना आसान नहीं होगा.

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