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ईरान और अमेरिका के बीच वॉर शुरू? खामेनेई सरकार ने सभी एयरस्पेस बंद करने का दिया आदेश!

ईरान में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने गुरुवार को अपने एयरस्पेस बंद करने का निर्देश दिया है. अमेरिकी हमले के डर के माहौल में सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया है.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: ईरान में तनाव बढ़ता ही जा रहा है. ईरानी सरकार ने गुरुवार सुबह अचानक अपना एयरस्पेस बंद करने का आदेश जारी कर दिया, जिससे पूरे इलाके में नई चिंता फैल गई. मिल रही जानकारी के मुताबिक इसे अस्थायी रूप से बंद किया गया है, हालांकि सरकार की ओर से इसके बारे में कोई भी सफाई नहीं दी गई है.

ईरानी सरकार ने बुधवार को संकेत दिए कि प्रदर्शनों में गिरफ्तार किए गए संदिग्धों पर जल्द मुकदमे चलाए जाएंगे और उन्हें मौत की सजा दी जा सकती है. हालांकि ट्रंप ने किसी भी प्रदर्शनकारी को मौत की सजा ना देने की चेतावनी दी है.

ईरान ने क्या कहा?

इस्लामिक गणराज्य ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यह उनका घरेलू मामला है, इसमें अगर अमेरिका या इजरायल हस्तक्षेप करता है तो उन्हें भी कड़ा जवाब दिया जाएगा. वहीं रिपोर्टरों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें सूचित किया गया है कि ईरान में फांसी की योजनाएं रुक गई हैं. यह बयान ट्रंप के प्रदर्शनकारियों को मदद आ रही है कहने के एक दिन बाद आया, जहां उन्होंने कहा था कि उनका प्रशासन ईरानी सरकार की हिंसक कार्रवाई का उचित जवाब देगा.

व्हाइट हाउस में कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें बताया गया है कि ईरान में हत्याएं रुक रही हैं. फांसी की कोई योजना नहीं है. विश्वसनीय स्रोतों से मिली इस जानकारी का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया कि स्थिति में सुधार हो रहा है. दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तनाव कम करने की अपील की और अमेरिका से वार्ता के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया.

ईरान में बढ़ रही मृतकों की संख्या

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों में अब तक 2,615 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. इस विरोध प्रदर्शन में 153 सरकारी अधिकारी या समर्थक भी मारे गए हैं. इनमें 13 बच्चे और 14 ऐसे नागरिक शामिल हैं जो प्रदर्शनों से सीधे जुड़े नहीं थे. समूहों का अनुमान है कि 18,400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. विदेशी मीडिया के लिए ईरान की स्थिति का आकलन मुश्किल हो गया है, क्योंकि संचार सेवाओं पर पाबंदी के कारण स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं. एसोसिएटेड प्रेस जैसी एजेंसियां भी मृतकों की संख्या की पुष्टि नहीं कर पा रही हैं.