दुनियाभर में कोरोना महामारी से जूझ रहे लोगों के लिए अब हंता वायरस ने एक नई चिंता पैदा कर दी है. डच क्रूज जहाज एमवी होंडियस पर फैले इस खतरनाक वायरस ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को अलर्ट पर ला दिया है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वैसे तो यह संक्रमण मुख्य रूप से चूहों से ही फैलता है, लेकिन बहुत करीबी संपर्क होने पर इसका इंसान से इंसान में फैलना भी संभव है. इंसान से इंसान में संक्रमण की इस दुर्लभ घटना से बचाव की तैयारियां तेज हो गई हैं.
डब्ल्यूएचओ अधिकारी डॉ. मारिया के अनुसार, संभव है कि पहला मरीज जहाज पर सवार होने से पहले ही संक्रमित हो गया था. एमवी होंडियस जहाज पर संक्रमण के सात मामले सामने आए हैं, जिनमें से दो की पुष्टि हुई है. इस वायरस से तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक डच दंपति और जर्मन यात्री शामिल हैं. एक ब्रिटिश नागरिक को इलाज के लिए दक्षिण अफ्रीका भेजा गया है. जहाज पर तेईस देशों के एक सौ उनचास लोग मौजूद हैं.
इस वायरस का इतिहास चीन और दक्षिण कोरिया से गहराई से जुड़ा है. इस बीमारी का नाम दक्षिण कोरिया की हंता नदी के नाम पर रखा गया है. साल उन्नीस सौ अठहत्तर में इसी नदी के पास कोरियाई हेमटोलॉजिक बुखार का प्रकोप देखा गया था. कोरियाई युद्ध के दौरान इस बुखार के तीन हजार से अधिक मामले सामने आए थे, जिससे सैनिक प्रभावित हुए थे. साल उन्नीस सौ इक्यासी में आधिकारिक तौर पर हंता वायरस नाम दुनिया के सामने आया.
अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, यह वायरस उसी परिवार का है जो दक्षिण कोरिया में फैला था. अमेरिका में इसे न्यू वर्ल्ड हंता वायरस के नाम से जाना जाता है. यूरोपीय और एशियाई देशों में पाए जाने वाले संक्रमण को ओल्ड वर्ल्ड वायरस कहते हैं. इससे मरीजों को गुर्दे के सिंड्रोम के साथ गंभीर रक्तस्रावी बुखार होता है. कोई भी व्यक्ति अगर संक्रमित चूहों के करीब जाता है, तो उसे यह खतरनाक बीमारी तुरंत अपनी चपेट में ले लेती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस जानलेवा बीमारी के फैलने की मुख्य वजह चूहे होते हैं. संक्रमित चूहों को छूने से कोई भी आसानी से इसका शिकार हो सकता है. चूहों के पेशाब या उनके द्वारा कुतरी गई चीजों को छूने के बाद मुंह और नाक को स्पर्श करने से संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाता है. चूहों के काटने से भी इसका भारी खतरा रहता है. इसके शुरुआती लक्षणों में अत्यधिक थकान, तेज बुखार और मांसपेशियों में भारी दर्द शामिल है.