अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की पहली तस्वीर सार्वजनिक की. यह तस्वीर अमेरिकी युद्धपोत पर ली गई बताई जा रही है, जिसमें मादुरो के हाथ हथकड़ी से बंधे हुए हैं और आंखों पर पट्टी लगी है. ट्रंप ने यह फोटो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा की, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई.
अमेरिकी बलों ने एक बड़े और साहसिक सैन्य अभियान के तहत निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया. इस कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह ऑपरेशन बेहद शानदार और सटीक था. उन्होंने बताया कि जब अमेरिकी सेना वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र से बाहर निकल चुकी थी, तभी उन्होंने इस मिशन की सफलता पर संतोष जताया.
ट्रंप ने एक टीवी इंटरव्यू में स्वीकार किया कि इस सैन्य कार्रवाई के दौरान कुछ अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई. अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, ऑपरेशन का उद्देश्य मादुरो को पकड़ना और क्षेत्र में अमेरिकी हितों को सुरक्षित करना था.
BREAKING: President Trump Releases Photo of Maduro Aboard the USS Iwo Jima | The Gateway Pundit | by Cristina Laila https://t.co/yirW20YGEA
— DLW 🔥#MAGA (@Dlw20161950) January 3, 2026
यह ऑपरेशन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की विदेश नीति का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. ट्रंप पहले भी साफ कर चुके हैं कि वे अमेरिका को सीधे युद्ध में झोंकने से बचना चाहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य ताकत दिखाने से पीछे नहीं हटेंगे. इससे पहले जून महीने में उन्होंने ईरान के अहम परमाणु ठिकानों पर हमले का आदेश दिया था.
वेनेजुएला में हुई इस कार्रवाई के बाद दुनिया की कई राजधानियों में चिंता बढ़ गई है. कई देशों को आशंका है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अब वैश्विक सहमति की बजाय सीधे फैसले लेने की नीति पर चल रहा है. ‘ट्रंप 2.0’ के दौर में अमेरिका की यह नई रणनीति अंतरराष्ट्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है.
इससे पहले ट्रंप ने ईरान को भी कड़ी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान में मुद्रा संकट के बाद हो रहे प्रदर्शनों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसा का शिकार बनाया गया, तो अमेरिका उनकी मदद करेगा.
वेनेजुएला ऑपरेशन के जरिए ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज में किए गए उस वादे को भी दोहराया है, जिसमें पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के दबदबे को मजबूत करने की बात कही गई थी. यह कार्रवाई आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती है.