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आसमान से बरस रहा 'जहर'! तेहरान में काली बारिश ने मचाई तबाही, मंडरा रहा बड़ा खतरा

तेहरान में इजरायली हमलों के बाद 'काली बारिश' ने पर्यावरणीय संकट पैदा कर दिया है. तेल डिपो की आग से निकले जहरीले रसायनों ने हवा-पानी को प्रदूषित कर लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ा दिया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया का युद्ध अब प्रकृति के लिए काल बन गया है. हाल ही में तेहरान में हुई 'काली बारिश' ने सबको चौंका दिया है. इजरायली हमलों से तेल रिफाइनरियों में लगी आग ने आसमान को काला कर दिया. जब बारिश हुई, तो वह अपने साथ जहरीले रसायन लेकर आई, जिससे पूरा शहर प्रदूषण की चपेट में है.

यह मंजर 35 साल पुराने खाड़ी युद्ध की याद दिलाता है, जब कुवैत के तेल कुओं का धुआं ईरान तक पहुंचा था. प्रोफेसर नेजात रहमानियन के अनुसार, यह संकट और भी गंभीर है क्योंकि तेल भंडार आबादी के पास हैं. पहले भी जहरीले कणों ने वातावरण को नुकसान पहुंचाया था, और अब यह खतरा तेहरान के नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर रहा है.

रसायनों का जहरीला जाल 

रिपोर्टों के मुताबिक, युद्ध में अब तक 300 से अधिक ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है. मिसाइल धमाकों से निकलने वाली भारी धातुएं मिट्टी और जल स्रोतों में मिल रही हैं. इन जहरीले तत्वों का असर आने वाले कई दशकों तक बना रह सकता है. यह युद्ध अब मिट्टी और पानी के जरिए खामोशी से इंसानी शरीर में जहर घोलने का काम कर रहा है.

स्वास्थ्य पर गंभीर प्रहार 

जहरीली बारिश और हवा ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे सांस की बीमारियां और फेफड़ों को नुकसान हो सकता है. अम्लीय बारिश त्वचा के लिए भी घातक है. बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अधिक खतरा है. प्रशासन ने लोगों को घरों में रहने की सलाह दी है, क्योंकि हवा में मौजूद रसायन जानलेवा हो सकते हैं.

तेहरान का दोहरा संकट 

तेहरान पहले से ही वायु प्रदूषण से जूझ रहा है. यहां की भौगोलिक स्थिति प्रदूषक तत्वों को हवा में रोके रखती है. अब रिफाइनरियों के धुएं ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. शहर के पास मौजूद उद्योग और अब युद्ध जनित प्रदूषण मिलकर एक घातक मिश्रण बना रहे हैं. नागरिकों के लिए सुरक्षित हवा में सांस लेना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है, जो बेहद चिंताजनक है.

विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर तेल ठिकानों पर हमले जारी रहे, तो यह प्रदूषण पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा. यह संकट अब केवल ईरान तक सीमित नहीं है. यह युद्ध धरती के अस्तित्व के लिए भी खतरा बन चुका है. यदि हिंसा नहीं रुकी, तो आने वाली पीढ़ियों को एक बीमार और प्रदूषित विरासत मिलेगी, जिसका प्रभाव सदियों तक बना रहेगा.