नई दिल्ली: बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने रविवार को संकेत दिया कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो ढाका भारत में अपनी राजनयिक मौजूदगी को कम करने पर विचार कर सकता है. उन्होंने यह टिप्पणी हालिया सुरक्षा घटनाओं और विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में की. एक प्रेस ब्रीफिंग में हुसैन ने कहा कि फिलहाल बांग्लादेश भारत पर भरोसा कर रहा है, लेकिन परिस्थितियां प्रतिकूल होने पर अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा.
Bangladesh's Ministry of Foreign Affairs tweets, "The unjustifiable incident at the Bangladesh High Commission residence in New Delhi on 20 Dec 2025 is highly regrettable." pic.twitter.com/vK3Gl00jfE
— ANI (@ANI) December 21, 2025
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले के भालुका क्षेत्र में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना है. यहां 27 वर्षीय गारमेंट फैक्ट्री वर्कर दीपू चंद्र दास को कथित ईशनिंदा के आरोपों में एक उग्र भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला. बाद में उसके शव को आग के हवाले कर दिया गया. यह घटना मुहम्मद यूनुस के शासनकाल में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और भीड़तंत्र के बढ़ते प्रभाव को उजागर करती है.
हालांकि, रैपिड एक्शन बटालियन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि दीपू चंद्र दास ने सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक पोस्ट की थी.
इस हत्या के विरोध में 20 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के सामने कुछ युवाओं ने प्रदर्शन किया. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि इस दौरान हाई कमीशन की बाड़ तोड़ने या सुरक्षा में सेंध लगाने की कोई कोशिश नहीं हुई. उन्होंने कहा कि पुलिस ने कुछ ही मिनटों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही.
Our response to media queries regarding the reported demonstration in front of the Bangladesh High Commission in New Delhi on 20 December 2025 ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) December 21, 2025
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रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है. भारत ने बांग्लादेश सरकार से दीपू चंद्र दास की हत्या के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग की है. उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत वियना कन्वेंशन के तहत विदेशी मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.
तौहीद हुसैन ने भारत के आधिकारिक बयान को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय प्रेस नोट में घटनाओं को बेहद सरल रूप में पेश किया गया है, जबकि जमीनी हकीकत कहीं अधिक जटिल है. हुसैन ने सवाल उठाया कि आखिर प्रदर्शनकारी राजनयिक क्षेत्र के इतने करीब कैसे पहुंच गए. उन्होंने यह भी कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या को बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति से जोड़ना उचित नहीं है और बांग्लादेश इस मामले में अपनी कानूनी कार्रवाई करेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव के नए संकेत देता है. आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की भूमिका अहम होगी ताकि हालात को बिगड़ने से रोका जा सके.