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अंटार्कटिका में 'बर्ड फ्लू' का तांडव, 100% प्रजातियों के खात्मे का डर; वैज्ञानिकों ने दी अब तक की सबसे खौफनाक चेतावनी!

अंटार्कटिका के बर्फीले महाद्वीप पर बर्ड फ्लू का एक नया और बेहद घातक स्ट्रेन तेजी से फैल रहा है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस संक्रमित प्रजातियों को पूरी तरह खत्म करने की क्षमता रखता है, जिससे पेंगुइन और सील जैसे जीवों पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे ठंडे और शांत माने जाने वाले महाद्वीप अंटार्कटिका से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय की रातों की नींद उड़ा दी है. चिली के प्रमुख शोधकर्ता विक्टर नेइरा ने चेतावनी दी है कि अंटार्कटिका में बर्ड फ्लू का एक ऐसा स्ट्रेन फैल चुका है, जो वहां की वन्यजीव आबादी को 100 प्रतिशत तक खत्म करने की घातक क्षमता रखता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ चिली और चिली अंटार्कटिक इंस्टीट्यूट (INACH) से जुड़े वैज्ञानिक विक्टर नेइरा ने 'एएफपी' को बताया कि यह वायरस असाधारण रूप से विनाशकारी है. उनके अनुसार, "यह बीमारी कम समय में 100 प्रतिशत पक्षियों को मारने में सक्षम है. खौफनाक तथ्य यह है कि किसी खास इलाके में यह वायरस प्रवेश करने के मात्र एक या दो दिनों के भीतर ही 90 से 100 प्रतिशत जानवरों की जान ले सकता है.

900 किलोमीटर तक फैला मौत का जाल 

इस घातक स्ट्रेन की पहचान पहली बार अप्रैल 2024 में नेइरा और उनकी टीम ने 'स्कुआ' (एक प्रकार का ध्रुवीय समुद्री पक्षी) में की थी. तब से अब तक, यह वायरस वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन किए जा रहे करीब 900 किलोमीटर लंबे तटवर्ती क्षेत्र में फैल चुका है. हालिया अभियानों में इसके संक्रमण के नए मामले अंटार्कटिक कॉर्मोरेंट, केल्प गल्स, एडली और जेंटू पेंगुइन के साथ-साथ अंटार्कटिक फर सील में भी पाए गए हैं. नेइरा का कहना है कि वायरस अब पूरे अंटार्कटिक क्षेत्र में फैल चुका है.

अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे वन्यजीव

अंटार्कटिका की प्रजातियों के लिए यह संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इनकी आबादी पहले से ही बहुत सीमित है. उदाहरण के तौर पर, अंटार्कटिक कॉर्मोरेंट और स्कुआ जैसे पक्षियों की कुल संख्या महज 20,000 के आसपास है. ऐसे में 100% मृत्यु दर वाली बीमारी पूरी प्रजाति का नामोनिशान मिटा सकती है.

गौरतलब है कि साल 2021 से बर्ड फ्लू की एक वैश्विक लहर पक्षियों के प्रवास के जरिए दुनिया भर के स्तनधारियों और पक्षियों को प्रभावित कर रही है. इससे पहले साल 2023 में चिली में हजारों हंबोल्ट पेंगुइन इसी वायरस की भेंट चढ़ चुके हैं, लेकिन अंटार्कटिका में इसकी मौजूदगी भविष्य के लिए बड़े पारिस्थितिकी संकट का संकेत दे रही है.