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'लाखों घर, हजारों उद्योग और दुनिया का सबसे बड़ा स्लम,' प्रोजेक्ट धारावी पर शिंदे सरकार और ठाकरे में ठन क्यों गई?

महाराष्ट्र का प्रोजेक्ट धारावी, स्थानीय लोगों के साथ-साथ विपक्षी पार्टियों के भी निशाने पर है. राज्य में शिवसेना (उद्धव गुट) ने साफ कह दिया है कि जैसे ही वे सत्ता में आए, सबसे पहले इस प्रोजेक्ट को रद्द कर देंगे. अडानी और महाराष्ट्र सरकार के इस संयुक्त प्रोजक्ट पर अब खतरा मंडरा रहा है.

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शिवसेना (उद्धव बाल साहेब ठाकरे) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने रविवार को महाराष्ट्र सरकार से दो टूक कह दिया है कि धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत धारावी में निर्मित नई इमारतों का आवंटन, केवल वहां के निवासियों को ही होगा. उन्होंने कहा है कि धारावी में रहने वाले लोगों को वहां से बाहर नहीं निकाला जाएगा. उन्होंने कहा कि धारावी को तबाह नहीं करने देंगे.

आदित्य ठाकरे ने 'धारावी बचाओ आंदोलन' को संबोधित करते कहा, 'आप हमारे धारावी के लोगों को यहां से नहीं हटा पाएंगे. हम सभी महा विकास अघाड़ी के लोग यहां आए हैं. मैं आपको आश्वासन देता हूं कि चाहे कोई भी परिस्थिति हो, हम उन्हें धारावी वालों को छूने नहीं देंगे.'

'धारावी को नहीं बनने देंगे अडानी सिटी'

आदित्य ठाकरे ने कहा, 'धारावी को पुनर्विकास की जरूरत है लेकिन हमें सरकार से यह भरोसा चाहिए कि यहां जो इमारतें बनेंगी वे धारावी के लोगों की होंगी.' ठाकरे की नेतृत्व वाली शिवसेना, इस प्रोजेक्ट को शक की नजरों से देख रही है. गौतम अडानी को टेंडर मिलने के बाद शिवसेना (उद्धव गुट) ने कहा था कि मुंबई की धारावी को पार्टी पहचान को अडानी सिटी में नहीं बदलने देगी. 

क्या है प्रोजेक्ट धारावी?

महाराष्ट्र सरकार, धारावी में झुग्गियों को हटाकर, इमारतें बनाना चाहती है. यह एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-झोपड़ियों की कॉलोनी है. यह 625 एकड़ में फैली है, यहां 8 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. यहां हजारों छोटे उद्योग हैं, जो फल-फूल रहे हैं. इस इलाके में हजारों घर हैं, जिन्हें बस्ती कहते हैं. ये सबसे महंगे इलाके बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स से कुछ ही दूरी पर स्थित है.

साल 2004 में महाराष्ट्र सरकार ने धारावी को आधुनिक शहरी ढांचे में तब्दील करने की वकालत की. इसका वहां के स्थानीय लोगों ने विरोध किया. इन झोपड़ियों में दशकों से लोग रह रहे हैं. यहां से इस प्रोजेक्ट के जरिए 68,000 से ज्यादा लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा. जिन लोगों के 1 जनवरी 2000 से पहले घर है, उन्हें 300 वर्ग फीट का एक सरकारी घर फ्री में दिए जाने का घर प्रस्तावित है. 

अडानी पर है सबको ऐतराज

साल 2022 में अडानी ग्रुप को ये टेंडर मिला है. अडानी ग्रुप, 5069 करोड़ की बोली लगाकर, यहां पुनर्विकास परियोजना पर काम करना चाहता है लेकिन विपक्ष इसके आड़े आ रहा है. विपक्ष का कहना है कि यहां की समानांतर अर्थव्यवस्था इस विकास कार्य की वजह से ध्वस्त हो जाएगी.