केरल के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर वीडी सतीशन का नाम सामने आया है. इस नाम में ऐसी क्या खासियत है कि तमाम जद्दोजहद के बाद केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने उनका नाम तय किया है. 1964 में कोच्चि के पास नेट्टूर में जन्मे वीडी सतीशन का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ था.
पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता रहे सतीशन ने केरल स्टूडेंट यूनियन (KSU) के जरिए राजनीति में एंट्री ली. बाद में वह यूथ कांग्रेस से जुड़े और अपनी तेजतर्रार भाषण शैली व आक्रामक राजनीतिक रणनीति के कारण तेजी से पहचान बनाने लगे. सतीशन 2021 से पारावुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. पिछले दो दशकों में उन्होंने खुद को केरल में कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में स्थापित किया. वह पार्टी के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो पारंपरिक गुटबाजी से अलग युवा और सुधारवादी सोच की राजनीति करते हैं.
उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मोड़ 2021 में आया, जब कांग्रेस की हार के बाद उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया गया. शुरूआत में इस फैसले पर सवाल उठे, क्योंकि उनके पास मंत्री पद का अनुभव नहीं था, लेकिन अगले पांच वर्षों में उन्होंने पिनराई विजयन सरकार को भ्रद्यटाचार, गोल्ड स्मलिंग केस, आर्थिक संकट और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर लगातार घेरा. सियासी जानकारों को मानना है कि सतीशन ने कांग्रेस में नई ऊर्जा भरने का काम किया और यूडीएफ की वापसी में सबसे अहम भूमिका निभाई. यही वजय है कि पार्टी कार्यकर्ता उन्हें मुख्यमंत्री पद का स्वभाविक दावेदार मानने लगे.
आईयूएमएल का समर्थन भी उनके पक्ष को मजबूत कर रहा है. हालांकि कांग्रेस के कुछ नेताओं को डर है कि इससे बीजेपी तुष्टीकरण की राजनीति का मुद्दा उठा सकती है, लेकिन इन सब आशंकाओं के बीच कांग्रेस ने उनके नाम का ऐलान कर दिया कि कार्यकर्ताओं की इच्छा सर्वोपरि है और यही कारण कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की राह में सबसे बड़ा रोड़ा भी बना.