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उत्तरकाशी में 22 में से 9 ट्रेकर्स की मौत, 11 का रेस्क्यू, ट्रेकिंग के लिए काल कैसे बना सहस्त्रताल?

उत्तरकाशी के सहस्त्रताल में कुल 11 लोगों का बचाव टीम रेस्क्यू कर ले गई लेकिन अब भी 4 लोग लापता हैं, जिन्हें नहीं खोजा जा सका है. लापता और मरने वाले लोगों में ज्यादातर कर्नाटक से ही हैं. युद्ध स्तर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.

IAF
India Daily Live

उत्तराखंड का उत्तरकाशी ट्रेकिंग के लिए पर्यटकों के लिए काल बन गया. 4400 मीटर ऊंचे सहस्त्रताल में मौसम ऐसे खराब हुआ कि 9 लोगों की मौत हो गई और कई लापता हो गए. कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए पर्वतारोहियों का दल ट्रेकिंग के लिए आया था. खराब मौसम, बर्फबारी और घने कोहरे की वजह से यह दल रास्ता भटक गया और वहीं पर्वत पर इन्हें रात बिना पड़ी. 5 लोगों की मौत ठंड की वजह से हो गई. मरने वालों में 4 महिलाएं भी शामिल हैं.

उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि बेस कैंप में 2 ट्रैकर्स को सुरक्षित पहुंचाया गया है. रेस्क्यू टीम, लापता लोगों की तलाश में जुटी है. युद्धस्तर पर लोगों को बचाने के लिए काम किया जा रहा है लेकिन खराब मौसम की वजह से लोग उलझ जा रहे हैं. रेस्क्यू टीम का कहना है कि खराब मौसम की वजह से हेलीकॉप्टर भी उतारना मुश्किल है. 9 मृतकों की पहचान भी सामने आ गई है. सिंधु वेक्कलम, आशा सुधाकर, सुजाता मुंगरवाड़ी, विनायक मुंगारवाड़ी और चित्रा प्राणेश. सबकी उम्र 45 पार है. 

रेस्क्यू मिशन में जुटी IAF

जिला मजिस्ट्रेट डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट की रेस्क्यू टीम पर नजर है. अलग-अलग लोकेशन पर पर्वतारोहियों को तलाशा जा रहा है. इंडियन एयरफोर्स भी रेस्क्यू मिशन में जुटी है. सहस्त्रताल का खराब मौसम रेस्क्यू प्रभावित कर रहा है. सहसत्रताल ट्रेक रूट पर 2 चेतक हेलीकॉप्टर्स मंडरा रहे हैं. मिताली और हर्सिल हेलीपैड पर MI-17 तैनात है. 

कैसे सहस्त्रताल बना लोगों का काल?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को हिमालयन व्यू ट्रेकिंग एजेंसी ने कहा कि कर्नाटक के 18, महाराष्ट्र के 1 और 3 स्थानीय गाइड की एक टीम 29 मई को ट्रेकिंग के लिए निकली. इस टीम में कुल 22 सदस्य थे. वे  मल्ला-सिला-कुशकल्याण-सहस्त्रताल ट्रेक पर निकले थे. वे 7 जून तक वापस आने वाले थे, लेकिन खराब मौसम की वजह से वे रास्ता भटक गए.

 


SDRF कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने का कहना है कि 22 सदस्यों में से दो यात्रा शुरू होने पर उत्तरकाशी में ही रुक गए. बाकी लोग सहस्त्रताल के बेस कैंप पहुंचे और ट्रेकिंग शुरू किया. सहस्त्रताल के रास्ते में दो सदस्य बीमार हो गए. उन्होंने वहीं रुककर अपने साथियों का इंतजार किया. 

कैसे हुआ हादसा?

SDRF कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने दावा किया है कि सहस्त्रताल से लौटते समय टीम को खराब मौसम का सामना करना पड़ा. उन्होंने ट्रेकिंग जारी रखी. इसी दौरान 2 लोगों की मौत हो गई. 2 और लोग वहां आए और रात बिताई. ठंड ज्यादा होने की वजह से दोनों की मौत हो गई. 16 ट्रेकर्स बचे. 8 लोग बेस कैंप आ गए. लापता लोगों की तलाश अब भी जारी है.