तमिलनाडु की राजनीति में फिर आया ट्विस्ट, थलपति विजय नहीं जुटा पाए बहुमत; कल नहीं होगा शपथग्रहण!

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर नया राजनीतिक मोड़ आ गया है. सुत्रों के मुताबिक, टीवीके नेता विजय बहुमत साबित नहीं कर पाए हैं. शनिवार को संभावित शपथ ग्रहण टलने की चर्चा तेज हो गई है.

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Ashutosh Rai

तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके के नेता विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया. बहुमत के आंकड़े को लेकर अब सवाल खड़े हो गए हैं. सूत्रों के मुताबिक विजय के पास फिलहाल जरूरी समर्थन नहीं है. इसी वजह से शनिवार को होने वाले संभावित शपथ ग्रहण पर भी अनिश्चितता बन गई है.

राज्यपाल से मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी हलचल

शुक्रवार शाम विजय ने आर. वी. आर्लेकर से मुलाकात की थी. इस मुलाकात को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थी. बताया गया कि विजय ने राज्यपाल को समर्थन देने वाले विधायकों की सूची सौंपी और सरकार बनाने का दावा पेश किया. हालांकि, बाद में सामने आई जानकारी ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए. सूत्रों के अनुसार विजय ने 116 विधायकों के समर्थन का दावा किया, जबकि विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है.

समर्थन पत्रों पर खड़े हुए सवाल

राजभवन सूत्रों के मुताबिक जिन विधायकों के समर्थन पत्र विजय की ओर से पेश किए गए, उनमें कुछ अहम सहयोगी दलों के पत्र शामिल नहीं थे. बताया जा रहा है कि वीसीके और आईयूएमएल जैसे दलों के समर्थन पत्र राज्यपाल को नहीं सौंपे गए. इन दोनों दलों के पास दो-दो विधायक हैं और उनका समर्थन बहुमत के समीकरण में अहम माना जा रहा है.

शपथ ग्रहण समारोह

राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि विजय शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. यह भी कहा जा रहा था कि उन्होंने राज्यपाल से जल्द शपथ ग्रहण कराने का अनुरोध किया था. अब राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि फिलहाल विजय को सरकार बनाने के लिए औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया गया है. इसके बाद शपथ ग्रहण को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर विराम लग गया.

आगे क्या होगा?

तमिलनाडु में अब सभी की नजरें अगले राजनीतिक कदम पर टिक गई हैं. विजय की पार्टी के नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि उन्हें जरूरी समर्थन मिल जाएगा. वहीं विपक्ष इस स्थिति को अस्थिर बहुमत बता रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम साबित हो सकते हैं.