Tamil Nadu News: तमिलनाडु के नीलगिरी में मानसिक और बौद्धिक रूप से दिव्यांग लोगों के लिए एक अवैध शेल्टर होम को सील कर दिया गया है. पुलिस ने ये कार्रवाई तब की, जब अवैध शेल्टर होम के कैंपस में 20 लोगों के शव दबे हुए मिले. अधिकारियों ने बताया कि लवशोर चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से चलाया जा रहा ये शेल्टर होम 25 साल से बिना किसी अनुमति के चल रहा था. उन्होंने कहा कि शेल्टर होम में रहने वालों की बैकग्राउंड की जानकारी का कोई रिकॉर्ड नहीं है.
ये अवैध शेल्टर होम पंडालुर तालुक के नेल्लियालम के पास कुंथलाडी बेक्की में बना है. पिछले हफ़्ते नीलगिरी के जिला गवर्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में दर्ज की गई शिकायत के बाद ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ. इसके बाद 8 जुलाई को गुडालुर रेवेन्यू कमिश्नर और देवाला के डिप्टी एसपी ने शेल्टर होम का इंस्पेक्शन किया.
इंस्पेक्शन में पाया गया कि ये शेल्टर होम बिना लाइसेंस के चलाया जा रहा है. पाया गया कि यहां रह रहे मानसिक रूप से दिव्यांग काफी दयनीय परिस्थितियों में रह रहे थे और उन्हें बुनियादी सुविधाओं से जुझना पड़ रहा था. इससे भी अधिक परेशान करने वाली बात ये थी कि 20 से अधिक मृतकों के शवों को सरकारी अधिकारियों की जानकारी या सहमति के बिना कैंपस में ही दफना दिया गया था.
गांव के एडमिनिस्ट्रेशन अफसर षणमुगम ने अवैध दफन के बारे में नेलाकोट्टई पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया. फिलहाल, कैंपस से रिकवर किए गए 20 मृतकों की पहचान के लिए जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है. मृतकों के शरीर के अंगों को बेचने की संभावित कोशिशों के बारे में भी संदेह है, जिसकी पुलिस आगे जांच करेगी. नीलगिरी जिले के अधिकारियों ने शेल्टर होम के मालिक समेत 10 व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाया है.
शिकायत के अनुसार, 'लव शोर' नाम के इस अवैध शेल्टर होम का संचालन एक ट्रस्ट की ओर से किया जाता था, जिसके मैनेजिंग डायरेक्टर कालीकट के ऑगस्टिन थे. ऑगस्टिन और उनका परिवार कुंथलाडी बेक्की में रहता है. हालांकि, जब रेवेन्यू अफसर अवैध शेल्टर होम को सील करने पहुंचे, तब ऑगस्टिन मौके से गायब था.
मानसिक बीमारियों या बौद्धिक दिव्यांगता वाले लोगों को रखने के लिए किसी संगठन को मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, चेन्नई और दिव्यांग व्यक्तियों के कमिश्नरेट से लाइसेंस लेना जरूरी है. शिकायत मिलने के बाद शेल्टर होम का इंस्पेक्शन करने वाले रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने बताया कि शेल्टर होम में फिलहाल 13 लोग रह रहे थे. शेल्टर होम को सील करने के बाद सभी 13 लोगों को लाइसेंस वाले शेल्टर आश्रय गृहों में रखा गया है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में यहां रहने वाले लोगों से संभावित दुर्व्यवहार का मामला सामने नहीं आया है.
ये पहली बार नहीं है कि कोई शेल्टर होम जांच के दायरे में आया है. इससे पहले, अक्टूबर 2022 में वेल्लोर में बेसहारा और बुजुर्ग व्यक्तियों की सेवा करने वाले सेंट जोसेफ चैरिटी होम पर यहां रहने वाले लोगों से दुर्व्यवहार का आरोप लगा था. मामले की जानकारी के बाद जांच पड़ताल भी की गई थी. आरोपों को सही पाए जाने के बाद यहां से 69 बुज़ुर्गों का रेस्क्यू किया गया था. फिर उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में एडमिट कराया गया था.
फरवरी 2023 में विझुपुरम में, बेसहारा लोगों के लिए अंबू जोति आश्रमम से जुड़े चार व्यक्तियों को रेप समेत विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार किया गया था. यौन उत्पीड़न, शारीरिक शोषण और यातना की रिपोर्ट के साथ यहां रहने वाले 142 लोगों का रेस्क्यू किया गया था. कथित रूप से बेसहारा लोगों को खाना और रोजगार के नाम पर झूठे वादे करने वाली ये संस्था 2005 से अवैध रूप से चल रही थी.