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RG Kar Case: 164 दिन में रेपिस्ट और हत्यारे संजय रॉय को CBI ने दिलाई सजा फिर भी ममता बनर्जी क्यों हैं नाराज?

RG Kar Case: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को CBI की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के बलात्कार और हत्या से जुड़े मामले को कोलकाता पुलिस से जबरन छीन लिया गया.

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Gyanendra Tiwari

RG Kar Case: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में दोषी संजय रॉय को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को लेकर सीबीआई पर निशाना साधा. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस फैसले से खुश नहीं है. दोषी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी. उन्होंने सीबीआई जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस से जबरदस्ती यह केस छीना गया था. ऐसे में सवाल यह उठता है कि 164 दिन में सीबीआई ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई इसके बावजूद मुख्यमंत्री क्यों खुश नहीं है?

ममता बनर्जी ने दावा किया, "कोलकाता पुलिस ने जबरन यह केस छीना गया. अगर पुलिस होती तो दोषी संजय रॉय को फांसी की सजा मिलती."

फैसले पर क्या बोलीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी?

सेशन कोर्ट के फैसेल पर असंतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, मैं इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूं कि दोषी संजय को उम्रकैद की सजा दी गई. हम सबकी मांग थी कि उसे फांसी की सजा दी जाए लेकिन कोर्ट ने सिर्फ उम्रकैद की सजा सुनाई."

सोमवार को कोलकाता की सोशन कोर्ट ने संजय रॉय को ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप करने और उसका मर्डर करने के दोषी पाए जाने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाई. 

9 अगस्त 2024 को ट्रेनी डॉक्टर का शव आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंव अस्तपाल के सेमीनार हॉल में मिली थी. इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. बंगाल के डॉक्टरों ने 2 महीने से ज्यादा समय तक प्रदर्शन किया. हालांकि, सियालदह कोर्ट के जज आनिर्बन दास जो इस केस की सुनवाई कर रहे थे ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर से बाहर रखा. इसी कारण दोषी संजय रॉय को फांसी नहीं दी गई. 

कोर्ट ने संजय रॉय को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (बलात्कार), धारा 66 (हत्या करने के लिए सजा) और धारा 103 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया था. 

जज आनिर्बन दास ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ राज्य सरकार को पीड़िता के परिवार को 17 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया. कोर्ट ने कहा, क्योंकि पिड़िता की मौत ड्यूटी के दौरान अस्पताल में हुई थी. इसलिए यह राज्य की जिम्मेदारी बनती है कि वह डॉक्टर के परिवार को मुआवजा दे.