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500 साल बाद पूरा हो रहा है यहां के ठाकुरों का संकल्प, राम मंदिर उद्घाटन के बाद पहनेंगे पगड़ी, जानें क्या है पूरी कहानी

Kshatriya Will Wear Turban: अयोध्या के सरायरासी गांव के ठाकुरों की 500 साल बाद एक संकल्प पूरी होने वाली है. इस संकल्प के पूरे होने के बाद यहां के ठाकुर अपने सर पर पगड़ी बांधेंगे. आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी.

Purushottam Kumar

Kshatriya Will Wear Turban: अयोध्या में 22 जनवरी को राम लला का प्राण प्रतिष्ठा होने वाला है. प्राण प्रतिष्ठा को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में चल रही है. करीब 500 साल के लंबे इंतजार के बाद भगवान राम अब अपने घर में विराजमान होने वाले हैं. राम लला की इस प्राण प्रतिष्ठा से अयोध्या के सरायरासी गांव के ठाकुरों की एक कसम अब पूरी होने वाली है.

सरायरासी गांव में 90 फीसदी घर सूर्यवंशी ठाकुरों के हैं, ये ठाकुर खुद को श्रीराम का वंशज मानते हैं. इस गांव में रहने वाले ठाकुर बेटियों की शादी में ना तो मंडप पर छत बनाते हैं, ना पगड़ी पहनते हैं और ना ही चमड़े के जूते पहनते हैं. हालांकि, अहब राम लाल की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन यहां के ठाकुरों ने एक साथ होली और दिवाली मनाने की बात कही है.

500 साल पहले की है कहानी 

ये कहानी है साल 1528 की जब बाबर के सेनापति मीर बांकी ने अयोध्या में रामलला के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण शुरू कर दिया था. मीर बांकी के इस हरकत सरायरासी गांव के ठाकुर गजराज सिंह ने एक साथ करीब 90 हजार लोगों को इकट्ठा किया और मीर बाकी की सेना से लोहा लेने के लिए निकल पड़े. इसके बाद दोनों के बीच 10 दिन तक युद्ध चला. इस युद्ध में करीब 80 हजार सूर्यवंशी मारे गए और ठाकुरों की हार हुई. इस हार के बाद गांव की महिलाओं ने ठाकुर गजराज सिंह को धिक्कारते हुए पगड़ी की ओर इशारा कर कहा था कि जब तुम लोग मंदिर नहीं बचा पाए, तो ये पगड़ी किसी काम की नहीं है, इसे उतारकर फेंक दो.

गांव के ठाकुरों ने ली थी सौगंध

गांव की महिलाओं की बात सुनने के बाद गांव के ठाकुरों ने यह सौगंध ली कि अयोध्या में जब तक भगवान राम का मंदिर नहीं बन जाता तब तक वह पगड़ी नहीं पहनेंगे, न कभी सिर नहीं ढकेंगे. ठाकुरों के इस संकल्प के साथ आग करीब 500 साल बीत गए हैं. इतने समय बीतने के बाद आज तक इस गांव के ठाकुरों ने पगड़ी नहीं पहनी. इस गांव में बीते करीब 500 साल से बेटियों की शादी में मंडप को छाया नहीं जाता है. इस गांव में लड़के दूल्हा बनकर भी कभी पगड़ी नहीं पहनते, न ही कोई चमड़े के जूते पहनते हैं.

22 जनवरी को पूरा होने वाला है संकल्प

इस गांव के ठाकुरों के संकल्प अब करीब 500 साल बाद पूरे होने वाले हैं. इस गांव के लोग इस दिन का बहुत ही बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और अब एक लंबे इंतजार के बाद इनका संकल्प पूरा होने जा रहा है. एक लंबे इंतजार के बाद अब राम मंदिर निर्माण के बाद यहां के लोगों में जश्न का माहौल है. इस गांव के लोग अब होली और दिवाली दोनों को एक साथ मनाने की बात कह रहे हैं.