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Republic Day 2024: देश भक्ति का अनोखा तरीका, शहीदों की तस्वीर बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड कर चुके हैं अपने नाम

Republic day 2024: गाजियाबाद के रहने वाले कलाकार हुतांश वर्मा ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानियों को आदर भाव व्यक्त करने के लिए जो तरीका अपनाया है, वो बेहद खास है. हुतांश वर्मा वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुके हैं.

Purushottam Kumar
Republic Day 2024: देश भक्ति का अनोखा तरीका, शहीदों की तस्वीर बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड कर चुके हैं अपने नाम

हाइलाइट्स

  • हुतांश वर्मा के देश भक्ति का अनोखा तरीका, आर्मी करती है सराहना
  • वीरगति प्राप्त सैनिकों की तस्वीर बनाकर उनके परिवार को भेंट करते हैं.

आदित्य कुमार/ नोएडा: देश इस बार 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. भारत देश विश्व का सबसे बड़ा गणतंत्र है. जिसे पाने के लिए और इस महान गणतंत्र को बनाए रखने के लिए सैकड़ों हजारों लोगों ने अपनी जान बलिदान दे दिया. उन बलिदानियों को आदर भाव व्यक्त करने के लिए गाजियाबाद के रहने वाले कलाकार हुतांश वर्मा ने जो तरीका अपनाया है, वो बेहद खास है. हुतांश वर्मा वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुके हैं. 

बलिदान देने वाले सैनिकों की बनाते हैं तस्वीर

हुतांश वर्मा एक निजी स्कूल में बच्चों को पेंटिंग सिखाते हैं. उनकी देश भक्ति ऐसी है कि उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपना नाम दर्ज कराया है. हुतांश वर्मा वीरगति प्राप्त हुए सैनिकों की तस्वीर बनाते हैं और उन्हें सैनिकों के परिवार को भेंट करते हैं. हुतांश बताते हैं कि मैं यह काम पिछले दस साल से कर रहा हूं. अब तक मैंने 163 वीरगति को प्राप्त सैनिकों की तस्वीर अपने हाथों से बनाई है. इसके लिए बीते साल मेरा नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है. इससे पहले किसी भी व्यक्ति ने इस तरह का काम नहीं किया है.
 

Hutansh Verma
Hutansh Verma

पिता से मिली प्रेरणा, इंडियन आर्मी भी करती है सराहना

हुतांश वर्मा बताते हैं कि सबसे पहले मैंने जो तस्वीर बनाई थी, वो थी कारगिल युद्ध में बलिदान हुए विजयंत थापर की. जब वो तस्वीर बनाकर मैं उनके घर गया, और उनके फैमिली को अपने काम के बारे में बताया तो कुछ देर के लिए सब शांत था. उनकी फैमिली भी रो रही थी और मैं भी रोने लगा. आप समझ सकते हैं 25-28 साल का एक लड़का कैसे हमारे लिए खुशी खुशी बलिदान हो गया. हुतांश वर्मा कहते हैं कि बलिदान सैनिकों की तस्वीर बनाने की प्रेरणा भी मुझे अपने पिता के कारण मिली थी. वो कहते हैं कि एक दिन पापा समाचार देख रहे थे. तभी पापा ने किसी सैनिक के बलिदान होने की खबर देखी. वो इतने दुखी हुए कि उन्होंने मुझे इन सैनिकों के लिए तस्वीरें बनाने की बात कही. उसके बाद मैंने पहली तस्वीर विजयंत थापर की बनाई थी. उसके कुछ दिनों बाद ही पापा भी नहीं रहे. अब उनके उस सीख को आगे ले जा रहा हूं.

'काश कोई वीर हम न खोए...'

हुतांश वर्मा पूरे साल चित्र बनाते हैं, उसके बाद साल में एक  बार भ्रमण पर निकलते हैं और सभी बलिदानियों के परिवार को मुस्कुराती हुई तस्वीर उपहार स्वरूप भेंट करते हैं. वर्मा कहते हैं कि भगवान ने शायद मुझे इसके लिए चुना है. मैं जब भी टूर पर निकलता हूं, मेरे पास पैसे हो या न हो. कोई न कोई मदद करने वाला मिल ही जाता है जो मेरे टूर का खर्च उठाता है. लेकिन मैं नहीं चाहता कि इस तरह की कोई तस्वीर मुझे बनानी पड़े. अब तक मैं देश के सभी भाग में सैनिकों के परिवार से मिल चुका हूं. 163 तस्वीरों को बनाकर उनके फैमिली को फ्रेम करवाकर दे चुका हूं.