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इस पक्षी के दर्शन से खुल जाते हैं भाग्य! रामायण और भगवान श्रीराम से भी है खास कनेक्शन

नीलकंठ नाम का एक पक्षी होता है. कहा जाता है कि ये पक्षी भाग्य खोलने वाला होता है. विजयादशमी के दिन इस पक्षी के दर्शन किए जाते हैं और माना जाता है कि इसके दर्शन से ही भाग्य चमक जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस पक्षी का रामायण और प्रभु श्रीराम से खास कनेक्शन है.

Om Pratap

Neelkanth birds Ramayana  Lord Ram connection: नीलकंठ नाम का एक पक्षी होता है. कहा जाता है कि ये पक्षी भाग्य खोलने वाला होता है. विजयादशमी के दिन इस पक्षी के दर्शन किए जाते हैं और माना जाता है कि इसके दर्शन से ही भाग्य चमक जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस पक्षी का रामायण और प्रभु श्रीराम से खास कनेक्शन है. अयोध्या में भव्य राम मंदिर के उद्घाटन के मौके पर हम आपको नीलकंठ का रामायण और भगवान राम से कनेक्शन बता रहे हैं.

ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने इसी पक्षी को देखकर रावण की लंका पर विजय प्राप्त की थी. सामाजिक कार्यकर्ता विजय उपाध्याय के मुताबिक, ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने रावण को मारने से पहले 'शमी' वृक्ष के पत्तों को छुआ था और नीलकंठ के दर्शन के बाद उन्होंने लंका पर विजय प्राप्त की थी.

भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है नीलकंठ

मान्यताओं के मुताबिक, नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है. हिंदुस्तानी बिरादरी के उपाध्यक्ष विशाल शर्मा के मुताबिक, रावण को मारने के लिए भगवान श्री राम पर एक ब्राह्मण की हत्या का पाप लगा था, जिसके लिए भगवान राम ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उस समय भगवान शिव ने नीलकंठ के रूप में भगवान राम को दर्शन दिये थे; इसलिए, नीलकंठ को भगवान शिव का रूप भी माना जाता है. इसलिए लोग शुभ मौके पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन करते हैं.

नीलकंठ के दर्शन करने हो तो कहां जाएं?

नीलकंठ पक्षियों को देखने के लिए आपको आगरा के चंबल वन्यजीव अभयारण्य जाना होगा. कहा जाता है कि यहां नीलकंठ पक्षी का दर्शन यहां आसानी से हो जाता है. पर्यावरणविद और वन्य जीव प्रेमी देवाशीष भट्टाचार्य के मुताबिक, चंबल में नीलकंठ पक्षियों की संख्या पहले की तुलना में करीब 4 फीसदी बढ़ी है. उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में बहुतायत से पाए जाने वाले नीलकंठ पक्षी चंबल और उसके आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं और इनकी संख्या बढ़ती जा रही है.

बता दें कि कभी-कभी नीलकंठ पक्षी को किंगफिशर (एल्सेडिनिडे) मान लिया जाता है, लेकिन ये दोनों बिलकुल अलग हैं. कहा जाता है कि विष्णु के लिए भी इसकी पूजा की जाती है और दशहरा या दुर्गा पूजा के अंतिम दिन जैसे त्योहारों के दौरान इसको पकड़ा एवं छोड़ा जाता है. ऐसा माना जाता था कि इसके छोडे हुए पंख को घास में मिलाकर गायों को खिलाने से उनकी दूध की पैदावार में वृद्धि होती है. नीलकंठ ओडिशा, कर्नाटक और तेलंगाना का राज्य पक्षी भी है.