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'गाजर का हलवा खिलाया?' शुभांशु शुक्ला से पीएम मोदी ने पूछा दिलचस्प सवाल, जानिए ग्रुप कैप्टन मे क्या कहा?

भारत ने अंतरिक्ष अन्वेषण में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. शनिवार, 28 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर तैनात भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बातचीत की.

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Garima Singh

Shubhanshu Shukla: भारत ने अंतरिक्ष अन्वेषण में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. शनिवार, 28 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर तैनात भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बातचीत की. एक्सिओम-4 मिशन के तहत ISS पर पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बनकर शुभांशु ने इतिहास रच दिया है. यह बातचीत भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति और वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक बनी.

प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, “आप आज मातृभूमि से सबसे दूर हैं, लेकिन भारतवासियों के दिलों के सबसे करीब हैं. आपके नाम में भी ‘शुभ’ है, और आपकी यात्रा नये युग का शुभारंभ है. मेरे साथ 140 करोड़ भारतवासियों की भावनाएं हैं. मेरी आवाज में सभी भारतीयों का उत्साह और उमंग शामिल है. अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराने के लिए मैं आपको हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं देता हूं.”

भारतीय संस्कृति का अंतरिक्ष में स्वाद

बातचीत के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में पीएम मोदी ने पूछा, “आप जो गाजर का हलवा ले गए हैं, क्या इस्तेमाल करें अपने साथियों को?” शुभांशु ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “प्रधानमंत्री जी, कुछ खास चीजें मैं अपने देश से लेके आया हूं- गाजर का हलवा, मूंग दाल का हलवा और आम रस. भारत का जो समृद्ध पाक विरासत है, उसका सबने आनंद लिया. सबको बहुत पसंद आया, और अब तो सब ये कह रहे हैं कि कब वो नीचे जाएं और हमारे देश को विजिट करें.”

भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा का प्रतीक

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर है. 41 साल पहले राकेश शर्मा ने सोवियत अंतरिक्ष यान पर सवार होकर अंतरिक्ष में कदम रखा था. शुभांशु न केवल अंतरिक्ष में पहुंचे, बल्कि 14 दिनों तक ISS पर रहकर 30 वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा ले रहे हैं. इन प्रयोगों में जीव विज्ञान, पदार्थ विज्ञान, द्रव यांत्रिकी और अंतरिक्ष चिकित्सा जैसे क्षेत्र शामिल हैं.

शुभांशु ने अपने साथ एक छोटा भारतीय झंडा भी ले गए, जो 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है. उनके मिशन से न केवल भारत की वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक मान्यता मिल रही है, बल्कि यह भावी पीढ़ियों को भी प्रेरित कर रहा है.

अंतरिक्ष में भारत की उड़ान

शुभांशु का मिशन भारत के आत्मनिर्भर और नवाचार से भरे भविष्य का प्रमाण है. उनके प्रयोग अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मानव अस्तित्व को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. यह उपलब्धि भारत के वैज्ञानिक समुदाय और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक नई प्रेरणा है.