S-400 missile: दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान रूस निर्मित एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की अतिरिक्त खेप भारत को मिल सकती है. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एस-400 के अलावा भारत एस-500 मिसाइल रक्षा प्रणाली के नए संस्करण को भी अपग्रेड करने और खरीदने पर विचार कर रहा है.
भारत और रूस के बीच एस-400 प्रणाली खरीदने का पहला सौदा 2018 में हुआ था. उस समय 5 अरब डॉलर का यह सौदा वायु रक्षा प्रणाली की पांच इकाइयों के लिए था. पांच में से तीन स्क्वाड्रन की आपूर्ति हो चुकी है. अपने पहले कार्यकाल के दौरान, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत को चेतावनी दी थी कि इस अनुबंध पर आगे बढ़ने पर उसे काउंटरिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरीज़ थ्रू सैंक्शंस एक्ट (CAATSA) के प्रावधानों के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. फिर भी, यह सौदा हो गया.
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में जब पूछा गया कि क्या भारत हथियार प्रणाली की अतिरिक्त खेप खरीदने पर विचार कर रहा है, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया. उन्होंने मीडिया से कहा, ज़ाहिर है इससे अच्छा परिणाम मिला है. इसलिए, ऐसी और अधिक सिस्टम बनाने की आवश्यकता है; आप कितनी खरीद सकते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है. मैं फिर से इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा कि योजना क्या है, क्या हम और खरीदना चाहते हैं, कितना खरीदना चाहते हैं.
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के उड़ाए थे होश
भारतीय वायुसेना प्रमुख ने कहा कि इस मामले पर निर्णय लिया जाएगा, क्योंकि भारत भी अपनी वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की प्रक्रिया में है. उन्होंने कहा, "यह एक अच्छी हथियार प्रणाली साबित हुई है. हमारी अपनी प्रणाली भी विकसित हो रही है. इसलिए हम इस पर निर्णय लेंगे." बता दें कि पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने अहम रोल निभाया था.