जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि निकट भविष्य में ऐसा कुछ नहीं होने वाला है. हालांकि, उन्होंने विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में "कुछ सकारात्मक" होने की उम्मीद जताई. यह बयान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की हालिया बैठकों के बाद शुरू हुई चर्चाओं के जवाब में आया है.
राज्य दर्जे की अफवाहें और बैठकों का दौर
राष्ट्रपति मुर्मू ने रविवार को नई दिल्ली में पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के साथ अलग-अलग मुलाकात की. इन बैठकों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया. शाह ने जम्मू-कश्मीर बीजेपी प्रमुख सत शर्मा और लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता से भी मुलाकात की. सोमवार को ऑल जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान रजा अंसारी ने शाह से मुलाकात कर क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की. इन बैठकों ने यह अटकलें तेज कर दीं कि जम्मू-कश्मीर को जल्द ही राज्य का दर्जा मिल सकता है.
उमर अब्दुल्ला का बयान
उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा, “मैंने जम्मू-कश्मीर में कल क्या होगा, इस बारे में हर संभावना सुनी है. मैं स्पष्ट कहता हूं कि कल कुछ नहीं होगा- न तो कुछ बुरा होगा, न ही दुर्भाग्य से कुछ सकारात्मक. मैं अभी भी मानसून सत्र में कुछ सकारात्मक होने के प्रति आशावादी हूं, लेकिन कल नहीं.” उन्होंने दिल्ली में केंद्र नेतृत्व के साथ कोई मुलाकात या बातचीत से भी इनकार किया. “यह सिर्फ मेरा अनुमान है. कल इस समय देखते हैं.”
विशेषज्ञों की राय
सेवानिवृत्त सेना अधिकारी और लेखक कंवल जीत सिंह ढिल्लन ने ट्वीट किया, “कश्मीर में शांति बहुत बड़ी कीमत पर आई है... हमें जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए. शांति की स्थापना का चरण चल रहा है, हमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.” 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद से पीएम मोदी और शाह ने राज्य दर्जे की बहाली का आश्वासन दिया है, लेकिन कोई समयसीमा नहीं दी.
नए सिरे से चुनाव की संभावना
अफवाहें हैं कि राज्य दर्जे की बहाली के साथ नए सिरे से चुनाव हो सकते हैं. उमर अब्दुल्ला ने जून में कहा था, “मैंने पढ़ा है कि राज्य का दर्जा बहाल होगा, लेकिन नए सिरे से विधानसभा चुनाव होंगे. उन्हें ऐसा करने दीजिए, कौन रोक रहा है.”