नितिन गडकरी ने याद किया ईरान में शपथ ग्रहण समारोह, जब हमास नेता से मुलाकात के कुछ घंटे बाद आई थी हत्या की खबर

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साल 2024 में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाले हमास चीफ इस्माइल हानिया से मुलाकत को याद की. उन्होंने उस घटना से जुड़ी हत्या का अनुभव भी साझा किया है.

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Meenu Singh

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान ईरान से जुड़ा एक चौंकाने वाला अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि साल 2024 में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के दौरान उनकी मुलाकात हमास के एक शीर्ष नेता से हुई थी, मुलाकात के महज कुछ ही घंटों बाद हत्या कर दी गई थी.

गडकरी ने बताया कि वे इस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए गए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें विशेष रूप से ईरान भेजा था. समारोह के दौरान सभी विदेशी मेहमानों को एक फाइफ स्टार होटल में ठहराया गया था, जहां उनका स्वागत हुआ.

हमास के राजनीतिक प्रमुख से मिलाया हाथ

नितिन गडकरी के अनुसार, वहां मौजूद नेताओं में एक शख्स ऐसा था जो किसी देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा था, फिर भी उसे विशेष महत्व दिया जा रहा था. जब गडकरी ने उनसे हाथ मिलाया और बातचीत की, तब उन्हें पता चला कि वे हमास के राजनीतिक प्रमुख हैं. ईरानी सरकार ने उन्हें मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री के साथ विशेष तौर पर रखा था, जिससे वे काफी चर्चा में थे.

हालांकि गडकरी ने अपने भाषण में सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से संकेत मिला कि वे हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हानियेह की ही बात कर रहे थे.

रात में मिली चौंकाने वाली खबर

गडकरी ने बताया कि समारोह खत्म होने के बाद उन्होंने खाना खाया और सोने चले गए. तड़के करीब चार बजे उनके कमरे का दरवाजा खटखटाया गया. बाहर भारतीय राजदूत थे, जिन्होंने तुरंत निकलने की बात कही. जब गडकरी ने कारण पूछा तो बताया गया कि हमास के शक्तिशाली नेता की उनके कमरे में हत्या कर दी गई है.

गडकरी ने यह भी बताया कि जिस कमरे में वह ठहरे थे, वहां कड़ी सुरक्षा थी, इसके बावजूद यह घटना हो गई. यह खबर सभी के लिए हैरान करने वाली थी. 

इस्माइल हानियेह की हत्या

62 वर्षीय इस्माइल हानियेह कतर में रहते थे और ईरानी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान आए थे. शुरुआत में उनकी हत्या को लेकर कई सवाल उठे, लेकिन बाद में ईरानी अधिकारियों ने कहा कि उनके आवास के बाहर से हमला किया गया था. इस घटना के लिए हमास और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इजरायल पर आरोप लगाए थे.