MBBS की सरकारी सीट पाना क्यों है सबसे बड़ी चुनौती? एडमिशन का गणित जानकर चौंक जाएंगे आप

री-नीट 2026 में 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS सीटों की संख्या सीमित है. आंकड़े बताते हैं कि एक सरकारी MBBS सीट के लिए औसतन 36 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है.

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Reepu Kumari

देशभर में आज री-नीट 2026 को लेकर हलचल तेज है. लाखों छात्र डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने के लिए परीक्षा दे रहे हैं. इस बार 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है. हालांकि परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या जितनी बड़ी है, उतनी सीटें मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध नहीं हैं. यही वजह है कि हर साल की तरह इस बार भी सीमित सीटों के लिए लाखों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा. सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने की चुनौती सबसे कठिन मानी जा रही है.

सरकारी सीटों पर सबसे ज्यादा दबाव

मेडिकल शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले अधिकांश छात्र सरकारी कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह कम फीस और बेहतर अवसर हैं. लेकिन सीटों की संख्या सीमित होने के कारण प्रतियोगिता बेहद कठिन हो जाती है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS सीटों की संख्या 63,160 के आसपास है.

यही कारण है कि सरकारी सीटों के लिए अभ्यर्थियों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है. लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सीटों की सीमित संख्या उनके सामने बड़ी चुनौती बन जाती है.

निजी कॉलेजों में भी मौजूद हैं हजारों सीटें

देश में सरकारी संस्थानों के अलावा निजी और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में MBBS सीटें उपलब्ध हैं. ऐसे कॉलेजों में कुल 66,443 सीटें हैं. इन सीटों को जोड़ने पर देशभर में MBBS की कुल क्षमता 1,29,603 तक पहुंचती है.

इसके बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सरकारी संस्थानों को ही लक्ष्य बनाते हैं. यही वजह है कि सरकारी कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए कटऑफ और प्रतिस्पर्धा दोनों काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच जाते हैं.

एक सीट पर 36 उम्मीदवारों की दावेदारी

इस वर्ष की तस्वीर बताती है कि एक सरकारी MBBS सीट के लिए औसतन 36 उम्मीदवार प्रयास कर रहे हैं. यह आंकड़ा मेडिकल प्रवेश परीक्षा की कठिनाई को साफ तौर पर दर्शाता है. लाखों उम्मीदवारों में से केवल सीमित संख्या को ही सरकारी कॉलेजों में प्रवेश का मौका मिलेगा.

युवा अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा केवल एक टेस्ट नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और करियर की दिशा तय करने वाला पड़ाव है. इसलिए परीक्षा को लेकर उत्साह और दबाव दोनों देखने को मिल रहे हैं.

परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा का मजबूत घेरा

री-नीट 2026 को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। भारत के 551 शहरों में 5,440 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जबकि विदेशों के 14 शहरों में भी परीक्षा आयोजित की जा रही है. परीक्षा 12 भारतीय भाषाओं सहित विभिन्न माध्यमों में होगी.

एनटीए के अनुसार, परीक्षा संचालन के लिए 95 हजार से अधिक कमरों का उपयोग किया जा रहा है. निगरानी के लिए 1.38 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 51 हजार से ज्यादा जैमर्स तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या नकल की संभावना को रोका जा सके.