Mother Teresa Birth Anniversary 2025: मदर टेरेसा आज पूरी दुनिया उस महान संत और समाजसेवी को याद कर रही है, जिनका पूरा जीवन मानवता की सेवा को समर्पित रहा. मदर टेरेसा का जन्म आज के ही दिन 26 अगस्त 1910 को मेसेडोनिया के स्कोप्जे में हुआ था. वैसे तो पूरी दुनिया उन्हें मदर टेरेसा के नाम से जानती है लेकिन उनका पहले नाम कुछ और था. बचपन से ही संवेदनशील और सेवा-भाव से जुड़ी मदर टेरेसा मात्र 12 वर्ष की उम्र में यह महसूस कर चुकी थीं कि उनका जीवन मानवता के नाम होगा.
उन्होंने 18 साल की उम्र में सिस्टर्स ऑफ लोरेटो ज्वॉइन किया और मिशनरी कार्य की राह चुनी. जीवन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उन्होनें भारत का रुख किया. 6 जनवरी 1929 को मदर टेरेसा भारत आ गईं. यहां आकर उन्होनें गरीबों, बीमारों और असहाय लोगों के लिए बहुत सारे काम किए.
मदर टेरेसा का असली नाम एग्नेस था. बाद में उन्होंने संत टेरेसा ऑफ अविला से प्रेरित होकर अपना नाम टेरेसा रखा. ईसाई धर्म की परंपरा के अनुसार उनका बैप्टाइजेशन जन्म के अगले ही दिन हुआ और इसी वजह से वह 27 अगस्त को अपना जन्मदिन मानती थीं.
भारत आने के बाद उन्होंने दार्जिलिंग में रहकर बंगाली सीखी और कोलकाता के लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल में 20 साल तक पढ़ाया. लेकिन 1946 में मिले आध्यात्मिक अनुभव ने उनका जीवन बदल दिया. उन्होंने अध्यापन छोड़ दिया और सड़कों पर बेसहारा, लावारिस व बीमार लोगों की सेवा का संकल्प लिया. भारतीय समाज में आसानी से घुलने-मिलने के लिए उन्होंने साड़ी पहननी शुरू की और लोगों की मदद हेतु भीख तक मांगी. 1947 में उन्होंने भारत की नागरिकता ली और जीवनभर यहीं रहकर गरीबों का सहारा बनीं.
मदर टेरेसा की करुणा को लोग सिर्फ सेवा ही नहीं, बल्कि चमत्कार भी मानते हैं. पश्चिम बंगाल की मोनिका बेसरा ने दावा किया कि उनकी प्रार्थना से उनका कैंसर ठीक हो गया. वहीं एक फ्रांसीसी लड़की ने कहा कि मदर टेरेसा के मेडल को छूने से उसकी टूटी पसलियां सही हो गईं. इन घटनाओं को वेटिकन ने मान्यता दी और 2016 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें ‘संत’ घोषित किया.
मानवता की सेवा के लिए उन्हें 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार और 1980 में भारत रत्न मिला. उनकी विरासत आज भी मिशनरीज ऑफ चैरिटी के जरिए जारी है. मदर टेरेसा का जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा बिना किसी भेदभाव के ही की जा सकती है.