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अर्बन नक्सलियों का इतना आतंक? महाराष्ट्र सरकार लाई विधेयक, पढ़ें इसके बारे में सबकुछ

महाराष्ट्र सरकार, शहरी नक्सलियों पर नकेल कसने के लिए विधेयक ला रही है, जिससे किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधियों पर नकेल कसी जा सके. राज्य सरकार इसके लिए एक सलाहकार बोर्ड का गठन करेगी, जिसकी सिफारिश पर किसी भी संगठन को अवैध और गैरकानूनी घोषित किया जा सकेगा. क्या है महाराष्ट्र सरकार का पूरा प्लान, आइए समझते हैं.

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महाराष्ट्र सरकार, शहरी नक्सलवाद के खतरे से डर गई है. नक्सल फ्रंटल संगठनों के बढ़ते वर्चस्व की वजह से सरकार ने ऐसा विधेयक तैयार किया है, जिसके चलते ऐसे संगठनों पर नकेल कसी जा सकेगी. महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक, 2024 पेश किया है. अब अगर ये कानून बना तो नक्सलियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी. 

ऐसे व्यक्ति को अब जेल हो सकेगी, जो भले ही किसी गैरकानूनी संगठन का सदस्य न हो लेकिन अगर कोई ऐसे लोगों को आश्रय देता, मदद करता है, या प्रतिबंधित संगठनों को बढ़ावा देता है, तो उस पर एक्शन लिया जा सकता है. यह विधेयक राज्य को किसी संगठन को गैरकानूनी ठहराने का अधिकार देगा. यह फैसला, राज्य सरकार की ओर से गठित सलाहकार बोर्ड ले सकता है.

महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में अब भी नक्सलवादी सक्रिय हैं. ऐसे में माओवादी नेटवर्क के सुरक्षित घरों और शहरी ठिकानों का जिक्र करते हुए इस विधेयक में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो शहरी नक्सलियों की मुश्किलें बढ़ा देंगे.. ऐसे समूह जो संवैधानिक जनादेश के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की विचारधारा का प्रचार करेंगे, उन पर एक्शन होगा. ऐसे समूहों की मदद करने पर भी सजा मिलेगी.

क्यों महाराष्ट्र सरकार को पेश करना पड़ा विधेयक?

राज्य विधानसभा में यह विधेयक राज्य मंत्री उदय सामंत ने पेश किया. राज्य सरकार का तर्क है कि फ्रंटल संगठनों की गैरकानूनी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए ये कानून जरूरी था. मौजूदा कानून, नक्सलवाद से निपटने के लिए अप्रभावी और अपर्याप्त है. विधेयक में तर्क दिया है कि नक्सलियों के पास से जो साहित्य बरामद हुए हैं, उसमें शहरों के माओवादी नेटवर्क की झलक मिलती है.

विधेयक पेश करते वक्त सरकार ने कहा कि नक्सली संगठन, संयुक्त मोर्चे के जरिए आम लोगों में अशांति पैदा कर रहे हैं. उनका मकसद ये है कि संवैधानिक जनादेश के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की विचारधारा फैलाई जाए और राज्य सरकार को अस्थिर किया जाए.

विधेयक के मुताबिक क्या है गैरकानूनी गतिविधि?

विधेयक के मुताबिक ऐसी कोई भी गतिविधि, जिसकी वजह से सार्वजनिक व्यवस्था, शांति और सौहार्द पर संकट पैदा हो, या पैदा होने की आशंका हो, सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव में हस्तक्षेप हो, या मंशा हो, वह गैरकानूनी गतिविधि होगी.

गैरकानूनी संगठन क्या है?

कोई ऐसा संगठन, जो अपने मकसद के लिए किसी भी माध्यम, उपकरण के जरिए, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी गैरकानूनी गतिविधि में लिप्त होता है या सहायता करता है या सहायता देता है या प्रोत्साहित करता है, उसे गैरकानूनी संगठन कहा जाएगा.

क्या है अर्बन नक्सल पर बना विधेयक? समझिए इसकी ABCD

- अगर कोई ऐसे गैरकानूनी संगठन का सदस्य होगा, बैठकों में हिस्सा लेगा, मदद करेगा या मदद मांगेगा, उसे 3 साल की कैद होगी और 3 लाख रुपये जुर्माना देना होगा. 

- विधेयक में कहा गया है, 'जो लोग किसी गैरकानूनी संगठन का प्रबंधन करते हैं या उसके प्रबंधन में सहायता करते हैं या किसी ऐसे संगठन की बैठक को बढ़ावा देते हैं या बढ़ावा देने में सहायता करते हैं या कोई सदस्य जो किसी गैरकानूनी गतिविधि में लिप्त है, उसे तीन साल तक के कारावास और 3 लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा.'

- जो लोग गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं या योजना बनाते हैं, उन्हें 7 साल की सजा मिलेगी. 5 लाख रुपये का जुर्माना भी देना पड़ेगा.

- अगर किसी संगठन को गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है और बाद में सलाहकार बोर्ड ने इसकी पुष्टि की है तो जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त गैरकानूनी गतिविधियों के मकसद से इस्तेमाल किए जाने वाली जगहों को लिस्ट कर सकते हैं, उन्हें अपने कब्जे में ले सकते हैं और स्वामित्व से बेदखल कर सकते हैं. जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त ऐसी जगहों पर कब्जा लेते वक्त, पैसे, गारंटी और दूसरी संपत्तियों पर भी कब्जा ले लेंगे. 

- सरकार के पास किसी गैरकानूनी संगठन के धन को जब्त करने का अधिकार होगा.

- सरकार के पास यह शक्ति होगी कि अधिकारी उस व्यक्ति के किसी भी परिसर में प्रवेश कर सकेगा, जिसके लिए आदेश दिया गया है. अधिकारी मनी ट्रेल, किताबों, दस्तावेजों की जांच कर सकेगा.

- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के प्रावधानों के मुताबिक कोई भी आदेश दिया जा सकता है. इस कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे. उनकी जांच SI स्तर से नीचे की रैंक के पुलिस अधिकारी नहीं कर सकेंगे.

सलाहकार बोर्ड की क्या होगी रूप रेखा?

सलाहकार बोर्ड में तीन व्यक्ति शामिल होंगे. एक हाई कोर्ट के पूर्व जज हो सकते हैं, या जज की योग्यता रखते हैं. सरकार अन्य सदस्यों को नियुक्तकरेगी और उनमें से एक अध्यक्ष होगा. सलाहकार बोर्ड के पास सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत सिविल न्यायालय जैसे शक्तियां होंगी. सलाहकार बोर्ड, किसी भी गवाह को बुला सकता है, शपथ दिला सकता है, जांच कर सकता है, हलफनामों पर साक्ष्य ले सकता है, न्यायालय का कार्यालय से कागज ले सकता है, सार्वजनिक रिकॉर्ड मांग सकता है.