मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पुराना विवाद सुर्खियों में आ गया है. कंकावली विधायक और भाजपा नेता नितेश राणे को सिंधुदुर्ग की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 2019 की एक विवादित घटना के लिए एक महीने की जेल की सजा दी है. इस मामले में उन पर सरकारी इंजीनियर को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का आरोप साबित हुआ. हालांकि अदालत ने सजा को तुरंत निलंबित भी कर दिया और उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने का मौका प्रदान किया.
महाराष्ट्र के कंकावली विधायक नितेश नारायण राणे पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे हैं. वे स्वाभिमान संगठन के संस्थापक और प्रमुख भी हैं. 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांकावली सीट से 25 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. इंग्लैंड से एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा. उनके पिता नारायण राणे महाराष्ट्र की राजनीति के प्रमुख चेहरे रहे हैं और 1999 में राज्य के मुख्यमंत्री भी बन चुके हैं.
नितेश राणे के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि हाईवे की समस्या को लेकर प्रदर्शन करना ठीक है, लेकिन इंजीनियर के साथ जो व्यवहार किया गया वह उचित नहीं था. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे इस व्यवहार का समर्थन नहीं करते. जब उनसे पूछा गया था कि क्या नितेश माफी मांगेंगे, तो नारायण राणे ने जवाब दिया कि क्यों नहीं, मैं खुद उनसे माफी मांगने को कहूंगा. उन्होंने कहा था कि वह मेरा बेटा है. अगर पिता बिना गलती के माफी मांग सकता है तो बेटे को भी माफी मांगनी चाहिए.
चार जुलाई 2019 को कंकावली में गड नदी के पुल पर नितेश राणे ने मुंबई-गोवा राजमार्ग के चौड़ीकरण कार्य का जायजा लेने के लिए एनएचएआई के उप अभियंता प्रकाश शेडेकर को बुलाया था. सड़क की खराब गुणवत्ता और जलभराव की समस्या से नाराज राणे और उनके समर्थकों ने इंजीनियर से जवाब मांगा. अभियोजन के अनुसार गुस्से में उन्होंने शेडेकर पर कीचड़ भरा पानी डाला और उन्हें सबके सामने कीचड़ में चलने के लिए मजबूर किया.
अदालत ने सभी गवाहों और उपलब्ध सबूतों की गहन जांच के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के पुत्र नितेश राणे समेत 30 आरोपियों में से 29 को दंगा, हमला और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया. लेकिन नितेश राणे को आईपीसी की धारा 504 के तहत जानबूझकर अपमान करने का दोषी पाया गया. न्यायाधीश वीएस देशमुख ने कहा कि इंजीनियर उच्च पद पर थे, फिर भी उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, जो बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने फैसले में साफ कहा कि भले ही राणे का मकसद सड़क की घटिया गुणवत्ता और लोगों की परेशानी पर आवाज उठाना रहा हो, लेकिन किसी लोक सेवक को इस तरह बेइज्जत करना गलत है. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाएं बढ़ती रहीं तो सरकारी अधिकारी बिना डर के अपने कर्तव्य नहीं निभा पाएंगे. अदालत ने इसे सत्ता का दुरुपयोग भी बताया और कहा कि ऐसी प्रवृत्ति पर लगाम लगाना जरूरी है.
अदालत ने नितेश राणे की एक महीने की सजा को तुरंत निलंबित कर दिया है. उन्हें उच्च न्यायालय में अपील दायर करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है. इस मामले में शामिल अन्य 29 लोगों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया. राणे उस समय कांग्रेस पार्टी में थे और बाद में भाजपा में शामिल हुए.