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अंबरनाथ में हुआ बड़ा राजनीतिक खेला, कांग्रेस के सभी 12 निलंबित पार्षद हुए बीजेपी में शामिल

अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस के सभी 12 पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए हैं. चुनाव के बाद बने गठबंधन के टूटने के बाद यह बड़ा राजनीतिक खेला माना जा रहा है.

@RaviDadaChavan X account
Km Jaya

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ नगर परिषद की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है. यहां कांग्रेस के सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. चुनाव के बाद बने गठबंधन के टूटने के बाद यह बड़ा राजनीतिक खेला माना जा रहा है. बुधवार देर रात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इन पार्षदों के पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की.

नगर परिषद चुनाव के बाद इन पार्षदों ने बीजेपी के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी का गठन किया था. इस फैसले से नाराज कांग्रेस ने सभी 12 पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया था. अंबरनाथ नगर परिषद के चुनाव 20 दिसंबर को हुए थे. नतीजों में शिवसेना शिंदे गुट 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. हालांकि शिवसेना बहुमत से चार सीट पीछे रह गई थी.

किसको मिली कितनी सीटें?

बीजेपी को 14 सीटें मिली थीं.
कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं.
अजित पवार गुट की एनसीपी को 4 सीटों पर जीत मिली थी.
बहुमत का आंकड़ा 30 पार्षदों का था.

कैसे बनी अंबरनाथ विकास अघाड़ी?

बीजेपी ने शिवसेना को किनारे रखते हुए कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी बनाई. एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन से इस गठबंधन की संख्या 32 तक पहुंच गई. अब कांग्रेस के सभी 12 पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने से यह समीकरण और मजबूत हो गया है.

रवींद्र चव्हाण ने क्या कहा?

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि इन पार्षदों ने जनता से विकास का वादा किया था. उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की विकास केंद्रित नीति से प्रभावित होकर पार्षदों ने बीजेपी का साथ चुना. बीजेपी के अनुसार इससे अंबरनाथ में विकास कार्यों को गति मिलेगी.

अब बीजेपी नेतृत्व वाली अघाड़ी नगर परिषद में सत्ता संभालने जा रही है. यह घटनाक्रम शिवसेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता से बाहर हो गई है. अंबरनाथ मुंबई से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है. यह ठाणे जिले का एक प्रमुख शहर है. यह शहर अपने प्राचीन अमरनाथ शिव मंदिर के लिए भी जाना जाता है.स्थानीय राजनीति में इस बदलाव से आने वाले समय में समीकरण और बदल सकते हैं.