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'तख्तियां और AI-जनरेटेड तस्वीरें न दिखाएं', विपक्ष के 8 निलंबित सांसदों का सस्पेंशन रद्द, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया फैसला

लोकसभा में आज एक अहम फैसला लिया गया. इस फैसले से विपक्ष के उन 8 सांसदों को राहत मिली, जिन्हें निलंबित कर दिया गया था. इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.

ANI
Shanu Sharma

बजट सत्र के दौरान हुए हंगामे के बाद विपक्ष के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था. हालांकि आज लोकसभा में अहम फैसला लेते हुए इन सांसदों के निलंबन को वापस ले लिया गया है. इस कदम को कार्यवाही को सुचारू बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इस फैसले से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इसी दौरान इसमें सभी दलों ने सहमति जताई.

बजट सत्र के पहले चरण के दौरान हुए हंगामे में इन सदस्यों पर मर्यादा भंग करने का आरोप लगा था. इस दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों ने अध्यक्ष के आसन की ओर कागज फेंका था. उनके इस व्यवहार के कारण उन सदस्यों को पूरे सत्र से बाहर कर दिया गया था.

सभी नेताओं के साथ की बैठक 

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोमवार को इस पर फैसला लेने के लिए सभी दलों के नेताओं से बैठक की. जिसमें सांसदों ने आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि भविष्य में सदन के वेल में जाकर विरोध नहीं करेंगे और अध्यक्ष की ओर कोई भी  कागज नहीं फेंकेंगे. साथ ही यह भी कहा गया कि तख्तियां या एआई से बने पोस्टरों का इस्तेमाल भी नहीं किया जाएगा. उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने का वादा किया है.

इस फैसले पर सहमति बनने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को सदन में एक प्रस्ताव पेश किया. जिसमें अनुच्छेद 370 के तहत कार्रवाई करते हुए निलंबन समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया. सदन ने इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया और फिर यह फैसला दोपहर 12 बजे से प्रभावी हो गया. विपक्ष द्वारा लंबे समय से इन सदस्यों के निलंबन को रद्द करने की मांग की जा रही थी.

इन 8 सांसदों का हुआ था निलंबन

इस सत्र के दौरान हंगामा करने के आरोप में मणिकम टैगोर,डीन कुरियाकोस, प्रशांत पाडोले, अमरेंद्र सिंह राजा वारिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन और चमाला किरण कुमार रेड्डी को निलंबित किया गया था. ये सभी सांसद कांग्रेस के हैं. इनके अलावा सीपीआई-एम के सांसद एस. वेंकटेशन भी निलंबित हुए थे. हालांकि अब इन सासंदों को राहत मिली है. अब उम्मीद  की जा रही है कि कई लंबित मुद्दों पर फैसले लिए जा सकते हैं.