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मोदी सरकार का बड़ा कदम, लद्दाख में 5 नए जिलों के गठन को LG की हरी झंडी; कुल जिलों की संख्या हुई 7

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश में पांच नए जिलों - नुब्रा, शाम, चांगथांग, ज़ांस्कर और द्रास के गठन को मंजूरी दे दी है. यह ऐतिहासिक कदम प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा करेगा.

KanhaiyaaZee
मोदी सरकार का बड़ा कदम, लद्दाख में 5 नए जिलों के गठन को LG की हरी झंडी; कुल जिलों की संख्या हुई 7
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: लद्दाख के प्रशासनिक इतिहास में सोमवार का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है. उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पांच नए जिलों के निर्माण की अधिसूचना को मंजूरी देकर वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर दिया है. लेह और कारगिल जैसे विशाल जिलों के प्रशासनिक बोझ को कम करने और शासन को आम आदमी की दहलीज तक पहुंचाने के लिए यह बड़ा निर्णय लिया गया है. यह फैसला क्षेत्र में विकास की गति को तेज करने और जन-सेवाओं को सुगम बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया पर इस फैसले को लद्दाख के लिए 'ऐतिहासिक दिन' करार दिया है. नए जिलों- नुब्रा, शाम, चांगथांग, ज़ांस्कर और द्रास के गठन के साथ अब लद्दाख में कुल जिलों की संख्या बढ़कर सात हो गई है. इससे पहले यह विशाल केंद्र शासित प्रदेश केवल दो जिलों के सहारे अपने प्रशासनिक कार्यों का संचालन कर रहा था. गृह मंत्रालय द्वारा पहले ही अनुमोदित यह अधिसूचना अब आधिकारिक रूप से क्षेत्र में शासन के एक नए और मजबूत ढांचे को स्थापित करने के लिए तैयार है.

लद्दाख का विशाल भूगोल और चुनौतियां 

भौगोलिक रूप से लद्दाख भारत का सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश है. जिसका क्षेत्रफल 86,904 वर्ग किलोमीटर है. हालांकि. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या मात्र 2.74 लाख है. चीन और पाकिस्तान की संवेदनशील सीमाओं से सटे होने के कारण यहां का सामरिक महत्व बहुत अधिक है. दुर्गम रास्तों और विशाल क्षेत्रफल के कारण केवल दो जिलों से पूरे क्षेत्र का प्रबंधन करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी. जिसे अब इस नए विभाजन के माध्यम से हल करने का प्रयास किया गया है.

सुशासन और विकेंद्रीकरण पर जोर 

यह क्रांतिकारी कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित लद्दाख' के विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. उपराज्यपाल के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में लिए गए इस निर्णय से जमीनी स्तर पर शासन मजबूत होगा. सत्ता और प्रशासन के विकेंद्रीकरण से न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों की समस्याओं का समाधान भी त्वरित गति से होगा. यह पहल सीधे तौर पर सार्वजनिक सेवा वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाएगी.

रोजगार और निवेश की नई उम्मीदें 

नए जिलों के गठन से न केवल शासन करीब आएगा, बल्कि आर्थिक विकास की संभावनाओं को भी बल मिलेगा. उपराज्यपाल का मानना है कि नई प्रशासनिक इकाइयां बनने से विकास, रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुलेंगे. नए सरकारी कार्यालयों और बुनियादी ढांचों के निर्माण से स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों के नए अवसर पैदा होंगे. इसके साथ ही स्थानीय व्यापार और लघु उद्योगों को भी प्रशासनिक सहयोग अधिक सुलभता से मिल सकेगा, जिससे लद्दाख की अर्थव्यवस्था को भविष्य में एक नई मजबूती और स्थिरता मिलने की उम्मीद है.

बदलती तस्वीर और केंद्र का नियंत्रण 

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के खात्मे के साथ लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. तब से यह क्षेत्र सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है. उपराज्यपाल ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि प्रशासन का लक्ष्य लद्दाख को अधिक समृद्ध और सुरक्षित बनाना है. यह ऐतिहासिक फैसला न केवल शासन को नागरिकों के करीब लाएगा, बल्कि एक उज्ज्वल और सशक्त लद्दाख के निर्माण की दिशा में सामूहिक यात्रा का आगाज करेगा, जिससे प्रदेश का हर नागरिक लाभान्वित हो सकेगा.