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कश्मीर में 40 दिन तक पड़ेगी कड़ाके की ठंड, चिल्ला-ए-कलां शुरू; बारिश-बर्फबारी के आसार

पूरे भारत में ठंड का कहर जारी है, भारत के कई इलाकों में बर्फबारी शुरु हो चुकी है. वहीं कश्मीर में 40 दिनों तक चलने वाली भीषण ठंड चिल्ली ए कलां शुरु हो गई है, पहले से ही ठंड झेल रहे कश्मीरिवासियों के लिए ये समय मुश्किल होने वाला है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
कश्मीर में 40 दिन तक पड़ेगी कड़ाके की ठंड, चिल्ला-ए-कलां शुरू; बारिश-बर्फबारी के आसार
Courtesy: Pinterest

कश्मीर: ठंड का कहर जारी है, पूरे देश में भीषण ठंड पड़ रही है. कई जगह तो बर्फबारी भी शुरु हो चुकी है. देश के अलग-अलग इलाकों में ठंड अपना कहर दिखा रही है. जहां पर आम जनजीवन अस्तव्यस्त है. इसी कड़ी में कश्मीर में 40 दिनों तक चलने वाली भीषण ठंड चिल्ला ए कलां शुरु हो गई है. जोकि 21–22 दिसंबर की रात से शुरु हो सकता है. पहले से ही ठंड झेल रहे कश्मीरिवासियों के लिए ये समय मुश्किल होने वाला है. इसके साथ ही वहां पर बारिश और बर्फवारी की भी संभावना है. 

तापमान में तेज गिरावट की आशंका

आशंका जा रही है कि आने वाले समय में यहां के तापमान में गिरावट हो सकती है. इन 40 तक चलने वाले इस चिल्ला ए कला के बाद चिल्ले बच्चा का समय आता है. इस दौरान आमतौर पर तापमान शून्य से 5 से 6 डिग्री नीचे चला जाता है.

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 40 दिनों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिलेगी. बता दें इतिहास में साल 1986 में कश्मीर में सबसे ज्यादा ठंड दर्ज की गई थी, जब तापमान शून्य से 9 डिग्री नीचे पहुंच गया था. तब डल झील पूरी तरह से जम गई थी.

भारी बर्फबारी की संभावना

मौसम विशेषज्ञों ने अगले एक सप्ताह के भीतर भारी बर्फबारी की संभावना जताई है. इसके साथ ही हल्की बारिश और बर्फबारी का भी अनुमान लगाया गया है.  रविवार से श्रीनगर और आसपास के इलाकों में रुक-रुककर बारिश हो रही है.  

चिल्ला-ए-कलां के पहले दिन हुई बारिश और बर्फबारी को स्थानीय लोग शुभ मानते हैं. बता दें चिल्ला-ए-कलां एक फारसी शब्द है, जिसका अर्थ है प्रचंड ठंड. मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटों में श्रीनगर और घाटी के अन्य इलाकों में बारिश और बर्फबारी बढ़ सकती है.

जलवायु परिवर्तन का असर

हाल के वर्षों में देखा गया है कि चिल्ला-ए-कलां के बजाय बाद के चरणों, यानी चिल्ले खुर्द और चिल्ले बच्चा के दौरान ज्यादा बर्फबारी हो रही है. 

विशेषज्ञ का कहना है कि ये जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण हो रहा है, क्योंकि मौसम के पुराने पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है.