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Jharkhand Politics: विधानसभा चुनाव में चंद महीने बाकी, CM के तौर पर हेमंत सोरेन की वापसी! आखिर क्या मैसेज देना चाहता है JMM?

Jharkhand Politics: हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों से पता चला है कि हेमंत की गिरफ्तारी के कारण आदिवासी वोट जेएमएम की ओर झुक सकते हैं. भाजपा राज्य में एसटी के लिए आरक्षित पांच सीटों में से एक भी नहीं जीत पाई. विधानसभा चुनाव में 81 में से 28 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं. अगर लोकसभा चुनाव वाले नतीजे दोहराए जाते हैं, तो कहानी कुछ और ही होगी.

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Jharkhand Politics: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक दल ने बुधवार को हेमंत सोरेन को अपना नेता चुन लिया. अब हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर फिर से वापसी करने जा रहे हैं. चंपई सोरेन ने बुधवार शाम राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसके बाद हेमंत ने सरकार बनाने का अनुरोध पेश किया. अब राज्यपाल हेमंत और उनके मंत्रियों के शपथ ग्रहण की तारीख तय करेंगे. हेमंत ने पांच महीने पहले मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तारी से पहले सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद चंपई ने पदभार संभाला था.

हेमंत को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नियमित जमानत मिलने से झारखंड मुक्ति मोर्चा को बल मिला है. झारखंड हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि ये मानने के लिए कारण मौजूद हैं कि वह दोषी नहीं है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने भी माना कि वे भी कोर्ट के इस कदम से हैरान हैं.

आखिर झारखंड मुक्ति मोर्चा क्या मैसेज देना चाहती है?

झारखंड विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं. चंपई सोरेन ठीक-ठाक सरकार भी चला रहे थे, लेकिन आखिर क्यों झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चंपई को हटाकर एक बार फिर राज्य की कमान हेमंत के हाथ में दे दी. सूत्रों के मुताबिक, हेमंत के नेतृत्व वाली JMM जनता के बीच ये संदेश लेकर जाने वाली है कि उन्हें केंद्र सरकार की ओर से नियंत्रित एजेंसी ने 'झूठे' मामले में 5 महीने तक जेल में रखा, जिससे उन्हें सीएम का पद छोड़ने के लिए 'मजबूर' होना पड़ा. साल के अंत में होने वाले चुनावों के साथ, ये जेएमएम के लिए सबसे अच्छी स्थिति है, जो वैसे भी लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर गई है.

उम्मीद है कि हेमंत सोरेन, सरकार में रहते हुए अपने किए गए बाकी बचे वादों को भी चुनावों से पहले पूरा करेंगे. हेमंत के करीबी सूत्रों ने ये भी बताया कि हालांकि जमानत पर बाहर आने के तुरंत बाद वे पदभार संभालने के लिए इच्छुक नहीं थे.

क्या चम्पई सोरेन ने स्वेच्छा से बाहर निकले?

बिलकुल नहीं. सूत्रों ने बताया कि चंपई ने पार्टी के इस फैसले पर हैरानी जताई और कहा कि दो महीने में चुनाव होने वाले हैं और उन्हें पद से हटाने की कोशिश अच्छी नहीं लगेगी. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वे खुद भी एक जन नेता हैं, लेकिन हेमंत जमानत पर बाहर हैं और उनकी सरकार को फिर से अस्थिर करने की कोशिश हो सकती है.

जेएमएम और उसके गठबंधन सहयोगियों की बैठक में मौजूद एक सूत्र ने बताया कि चंपई सोरेन ने कहा कि चुनाव से ठीक दो महीने पहले की बात है और इतनी जल्दी की क्या जरूरत थी? उन्होंने कहा कि मैं, हेमंत और उनकी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन को अपना बेटा और बेटी मानता हूं.

हालांकि, कांग्रेस और आरजेडी समेत गठबंधन सरकार के सभी सदस्यों ने बैठक में हेमंत का समर्थन किया, जिससे चंपई के पास बहुत कम विकल्प बचे. बताया जाता है कि बैठक में मौजूद कांग्रेस के एक विधायक ने कहा कि गठबंधन की 2019 की जीत हेमंत के लिए थी और उनके नेतृत्व में फिर से चुनाव लड़ना उनके लिए अच्छा रहेगा. नेताओं ने ये भी कहा कि ये महत्वपूर्ण है कि गठबंधन की सरकार एक स्पष्ट मैसेज दे कि आखिर झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्व कौन कर रहा है.

तो अब चंपई सोरेन का क्या होगा?

कहा जा रहा है कि चंपई सोरेन को नई हेमंत सरकार में शामिल किया जा सकता है, लेकिन सूत्रों ने माना कि पार्टी सावधानी से कदम उठाएगी और उनके अगले कदमों पर बारीकी से नज़र रखेगी. ये भी स्पष्ट नहीं है कि सीएम पद से हटने के बाद चंपई मंत्री पद लेने के लिए सहमत होंगे या नहीं. हेमंत जब पहले सीएम थे, तब चंपई एससी, एसटी, पिछड़ा कल्याण विभाग के साथ-साथ परिवहन विभाग के मंत्री थे.

सीएम के तौर पर चंपई का पांच महीने का कार्यकाल काफी सहज रहा, जिसमें जेएमएम नेता ने बहुत सावधानी से कई शब्दों में ये संकेत दिया कि वे 'हेमंत-पार्ट II' हैं. हेमंत की गिरफ्तारी के बाद कल्पना ने सार्वजनिक भूमिका निभाई, चंपई ने भी उनके पीछे खड़े हो गए. हालांकि, मंगलवार को जब ये साफ हो गया कि उन्हें सीएम पद से हटा दिया जाएगा, तो चंपई के लिए अपनी निराशा छिपाना मुश्किल हो गया. 

कहा जा रहा है कि 'नाराज' चंपई सोरेन से झारखंड मुक्ति मोर्चा सावधान ही रहेगा, क्योंकि कोल्हान इलाके में चंपई सोरेन को काफी समर्थन है, जिसमें 14 विधानसभा सीटें आती हैं. हालांकि, हेमंत के करीबी सूत्र बताते हैं कि उनके पास अब इस क्षेत्र में चंपई के अलावा कई विकल्प हैं. विकल्पों में चाईबासा (कोल्हान क्षेत्र में) से जेएमएम विधायक दीपक बिरुआ के पास कल्याण और परिवहन विभाग है. एक अन्य नेता जोबा मांझी भी हैं.

भाजपा ने इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया दी है?

झारखंड भाजपा चीफ बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झामुमो के इस फैसले से पता चलता है कि शिबू सोरेन परिवार से बाहर के आदिवासी नेता पार्टी के लिए सिर्फ़ काम चलाऊ हैं. उन्होंने कहा कि सोरेन परिवार ने उन्हें दूध में पड़ी मक्खी की तरह इस्तेमाल किया और फेंक दिया. झामुमो के आदिवासी नेताओं को इस बात से सावधान रहना चाहिए. राज्य में भाजपा के सबसे बड़े आदिवासी चेहरे मरांडी ने कहा कि उन्हें (झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल आदिवासी नेता) अपनी सीमाएं समझनी चाहिए.असम के मुख्यमंत्री और झारखंड भाजपा के सह-प्रभारी हेमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा कि झारखंड में झामुमो और कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सीनियर आदिवासी नेता को मुख्यमंत्री पद से हटाना बेहद दुखद है.