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बारिश-बाढ़ से हिल गया हिमाचल, मानसून में हुईं 336 मौतें, 9 सितंबर को PM मोदी कर सकते हैं दौरा

हिमाचल प्रदेश में कुल मिलाकर 4,07,9 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. मानसून के कारण पशुधन को भी नुकसान हुआ है, जिसमें 1,464 पशुओं और 26,955 मुर्गियों की मौत की सूचना है. राज्य भर में दर्ज की गई कुल घटनाओं में 135 भूस्खलन, 95 अचानक बाढ़ और 45 बादल फटने की घटनाएं शामिल हैं.

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Gyanendra Sharma

Himachal weather: हिमाचल प्रदेश में शनिवार को भी हल्की बारिश हुई. नदियां उफान पर हैं और डेंजर लेवल पर बह रही है. प्रदेश में इस मामसून में 366 मौतें हुई हैं. 203 मौतें बारिश से जुड़ी घटनाओं के कारण हुईं हैं जबकि 163 मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं हैं. इसी बीच सरकारी सूत्रों से सूचना सामने आई है कि PM नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को बाढ़ का जायजा लेने के लिए हिमाचल का दौरा कर सकते हैं.

हिमाचल प्रदेश में कुल मिलाकर 4,07,9 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. मानसून के कारण पशुधन को भी नुकसान हुआ है, जिसमें 1,464 पशुओं और 26,955 मुर्गियों की मौत की सूचना है. राज्य भर में दर्ज की गई कुल घटनाओं में 135 भूस्खलन, 95 अचानक बाढ़ और 45 बादल फटने की घटनाएं शामिल हैं. सबसे ज़्यादा घटनाओं वाले ज़िले लाहौल और स्पीति (83), कुल्लू (45) और मंडी (46) हैं.

प्राकृतिक आपदा का कहर

हिमाचल प्रदेश के कई जिले, विशेष रूप से चंबा, कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और शिमला, इस मानसून में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. भारी बारिश के कारण सड़कें टूट गई हैं, पुल बह गए हैं, और कई गांवों का संपर्क मुख्य क्षेत्रों से कट गया है. नदियों और नालों के उफान पर आने से खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, और कई घरों को भारी नुकसान पहुंचा है. ग्रामीण इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. राज्य को अब तक हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. 

पीएम मोदी का प्रस्तावित दौरा

इसी बीच, सरकारी सूत्रों से जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को हिमाचल प्रदेश का दौरा कर सकते हैं. इस दौरान वह बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेंगे. सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी विशेष रूप से चंबा और कुल्लू जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर सकते हैं, जहां बारिश और बाढ़ ने सबसे अधिक तबाही मचाई है. 

हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), और सेना की टीमें राहत और बचाव कार्यों में दिन-रात जुटी हुई हैं. कई फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, और राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. इसके बावजूद, कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है.