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Gaza के भविष्य पर बड़ा दांव, ट्रंप ने भारत को गाजा के 'बोर्ड ऑफ पीस' का हिस्सा बनने का दिया न्योता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निर्माण और प्रशासन के लिए गठित 'बोर्ड ऑफ पीस' में भारत को शामिल होने का न्योता दिया है, जिस पर वैश्विक स्तर पर सतर्क प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: गाजा युद्ध के बाद क्षेत्र के भविष्य को लेकर अमेरिका की नई पहल सामने आई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' नामक एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य गाजा में शासन व्यवस्था और पुनर्निर्माण की निगरानी करना है. इस बोर्ड में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है. भारत की भूमिका इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि उसके इजराइल और फिलिस्तीन- दोनों से ऐतिहासिक और संतुलित संबंध रहे हैं.

भारत को क्यों मिला न्योता

सूत्रों के अनुसार, भारत को यह आमंत्रण उसकी संतुलित कूटनीति और मानवीय भूमिका को देखते हुए दिया गया है. भारत इजराइल का रणनीतिक साझेदार है और साथ ही फिलिस्तीन को निरंतर मानवीय सहायता देता रहा है. हालिया संघर्ष शुरू होने के बाद भारत उन शुरुआती देशों में शामिल था, जिन्होंने मिस्र के जरिये गाजा को राहत सामग्री भेजी. यही वजह है कि भारत को दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य देश माना जा रहा है.

बोर्ड ऑफ पीस की संरचना

व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस पहल के तहत तीन स्तर बनाए गए हैं. पहला मुख्य बोर्ड होगा, जिसकी अध्यक्षता स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे. दूसरा एक फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट समिति होगी, जो जमीनी स्तर पर प्रशासन संभालेगी. तीसरा एक अलग ‘एग्जीक्यूटिव बोर्ड’ होगा, जिसकी भूमिका सलाहकारी मानी जा रही है. हालांकि, इन सदस्यों की जिम्मेदारियों को लेकर अभी स्पष्ट विवरण साझा नहीं किया गया है.

पाकिस्तान का दावा और इजराइल की आपत्ति

पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि उसे इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है. लेकिन भारत में इजराइल के राजदूत रयूवेन अज़ार पहले ही कह चुके हैं कि गाजा के भविष्य में पाकिस्तान की कोई भूमिका इजराइल को स्वीकार नहीं होगी. यह बयान दोनों देशों के बीच गहरे मतभेदों को दर्शाता है और बोर्ड की संरचना को लेकर संभावित विवाद की ओर भी इशारा करता है.

वैश्विक प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र की चिंता

ट्रंप की इस पहल पर दुनिया भर की सरकारों ने सतर्क रुख अपनाया है. करीब 60 देशों को भेजे गए निमंत्रणों में से अब तक केवल हंगरी ने खुलकर समर्थन जताया है. कई देशों के राजनयिकों ने निजी तौर पर चिंता जताई है कि यह व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकती है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, कई सरकारें सार्वजनिक बयान देने से बच रही हैं.

एग्जीक्यूटिव बोर्ड और नया विवाद

11 सदस्यीय गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान, संयुक्त राष्ट्र की मध्य-पूर्व समन्वयक सिग्रिड काग, यूएई की मंत्री रीम अल-हाशिमी सहित कतर और यूएई के अधिकारी शामिल बताए गए हैं. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा है कि इस सूची पर इजराइल से कोई समन्वय नहीं हुआ और यह उसकी नीति के विपरीत है, खासकर तुर्की की मौजूदगी को लेकर.