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आज रात 8 बजे के बाद नहीं मिलेंगे दिल्ली मेट्रो के टिकट, 9 बजे के बाद नहीं मिलेगी एग्जिट! 

Delhi Metro Update: दिल्ली मेट्रो 31 दिसंबर को रात 9 बजे के बाद राजीव चौक से बाहर निकलने की अनुमति नहीं देगी, जबकि प्रवेश जारी रहेगा. रात 8 बजे के बाद QR टिकट भी नहीं मिलेंगे. यह कदम भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए उठाया गया है. अन्य मेट्रो सेवाएं सामान्य रहेंगी. 

Shilpa Srivastava

Delhi Metro Update: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने नए साल से पहले यानी 31 दिसंबर को राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से रात 9 बजे के बाद यात्रियों को बाहर निकलने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है. DMRC ने सोमवार को जानकारी दी कि यह कदम पब्लिक की सेफ्टी सुनिश्चित करने और भीड़ को कंट्रोल करने के लिए उठाया गया है. हालांकि, यात्री स्टेशन में प्रवेश कर सकेंगे. अन्य सभी मेट्रो स्टेशनों पर मेट्रो सर्विसेज रेगुलर टाइम टेबल के अनुसार चलेंगी.

DMRC के प्रिंसिपल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल ने कहा कि यात्रियों को अंतिम ट्रेन के डिपार्चर तक स्टेशन में प्रवेश करने की अनुमति होगी. पुलिस अधिकारियों की सलाह पर यह फैसला लिया गया है जिससे नए साल की पूर्व संध्या पर पब्लिक सेफ्टी और क्राउड मैनेजमेंट सुनिश्चित किया जा सके.

8 बजे के बाद इस स्टेशन के लिए नहीं मिलेंगे टिकट:

इसके अलावा DMRC ने घोषणा की है कि रात 8 बजे के बाद राजीव चौक स्टेशन के लिए DMRC मोबाइल ऐप से QR टिकट जारी नहीं किए जाएंगे. यह कदम भीड़ को कंट्रोल करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है. अन्य सभी मेट्रो लाइनों पर सर्विसेज रेगुलर टाइम टेबल के अनुसार ही चलेंगी.

दिल्ली मेट्रो आमतौर पर सुबह 5:00 बजे से रात 11:30 बजे तक ऑपरेट होती है, हालांकि कुछ लाइनों और स्टेशनों के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है. उदाहरण के लिए, एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन सुबह 4:45 बजे से रात 11:30 बजे तक चलती है.

दिल्ली मेट्रो ने 24 दिसंबर को अपनी यात्री सर्विसेज के 22 वर्ष पूरे कर लिए हैं. 24 दिसंबर 2002 को पहली दिल्ली मेट्रो ट्रेन TS-01 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था. यह दिल्ली-एनसीआर में मॉर्डन पब्लिक ट्रांसपोर्ट की नई शुरुआत थी.

TS-01 ट्रेन शुरुआत में चार कोच की थी, जिसे 2014 में बढ़ाकर छह कोच और 2023 में आठ कोच कर दिया गया. यह ट्रेन दक्षिण कोरिया में MRM कंसोर्टियम द्वारा बनाई गई थी और इसे जहाज के जरिए कोलकाता लाया गया था, जहां से भारतीय रेलवे नेटवर्क द्वारा दिल्ली तक पहुंचाया गया.