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India Daily

भारत के ये शहर हैं साइबर ठगी के हॉटस्पॉट, 30000 लोग बने शिकार; गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा

गृह मंत्रालय की साइबर विंग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में देश के बड़े शहरों में 30,000 से अधिक लोग ऑनलाइन निवेश ठगी का शिकार बने हैं, जिससे लगभग 1,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और हैदराबाद इस साइबर ठगी के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बने हुए हैं.

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Edited By: Princy Sharma
भारत के ये शहर हैं साइबर ठगी के हॉटस्पॉट, 30000 लोग बने शिकार; गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय की साइबर विंग की एक चौंका देने वाली रिपोर्ट सामने आई है. जिसमें खुलासा हुआ है कि पिछले छह महीनों में भारत के बड़े शहरों में 30,000 से ज्यादा लोग ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कैम का शिकार हुए हैं और उन्हें 1,500 करोड़ रुपये के करीब का नुकसान हुआ है. इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की तरफ से जारी की गई यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे साइबर क्रिमिनल नकली इन्वेस्टमेंट के मौकों के जरिए लोगों के फाइनेंशियल सपनों को तेजी से टारगेट कर रहे हैं.

डेटा से पता चलता है कि बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और हैदराबाद सबसे बड़े हॉटस्पॉट हैं जहां कुल मिलाकर रिपोर्ट किए गए सभी मामलों का 65% हिस्सा है. इनमें से, बेंगलुरु को सबसे ज्यादा फाइनेंशियल नुकसान हुआ, जो चोरी हुई कुल रकम का 26% से ज्यादा था. हालांकि, दिल्ली में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा औसत नुकसान हुआ लगभग 8 लाख रुपये.

किस उम्र के लोग हो रहे साइबर ठगी का शिकार?

ज्यादातर पीड़ित 30 से 60 साल के बीच के हैं, जो सभी मामलों का तीन-चौथाई (76%) से ज्यादा हिस्सा हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस ग्रुप के लोग ज्यादा रिटर्न का वादा करने वाले ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट ऑफर के लालच में फंस जाते हैं. बता दें,  सीनियर सिटिजन भी इससे बचे नहीं हैं, लगभग 2,829 पीड़ित 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं, जो कुल मामलों का 8.6% है.

चालाकी से कर रहे स्कैम

ये स्कैम छोटे-मोटे फ्रॉड नहीं हैं, बल्कि इनमें बड़ी रकम शामिल है. हर पीड़ित ने लगभग 51 लाख रुपये गंवाए हैं, जिससे पता चलता है कि स्कैमर बहुत ऑर्गनाइज्ड और प्रोफेशनल तरीके से काम कर रहे हैं. साइबर क्रिमिनल लोगों को लुभाने के लिए ज्यादातर मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. 

किन ऐप पर होता है स्कैम? 

अकेले टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर रिपोर्ट किए गए सभी स्कैम का 20% हिस्सा है, क्योंकि उनका प्राइवेट और एन्क्रिप्टेड नेचर स्कैमर को छिपे रहने में मदद करता है. हैरानी की बात है कि लिंक्डइन और ट्विटर जैसे प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बहुत कम होता है, जो सिर्फ 0.31% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं.

लोगों को दी गई चेतावनी

दिलचस्प बात यह है कि स्कैम की सबसे बड़ी कैटेगरी लगभग 41.87% दूसरे प्लेटफॉर्म के अंदर आती है, जिसका मतलब है कि धोखेबाज इन्वेस्टर्स को टारगेट करने के लिए कई अनजान या नए ऑनलाइन स्पेस का इस्तेमाल कर रहे हैं. रिपोर्ट में लोगों को जल्दी रिटर्न देने वाले इन्वेस्टमेंट ऑफर से सावधान रहने की चेतावनी दी गई है, खासकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप पर. अधिकारियों ने यूजर्स से कहा है कि वे ऑफिशियल फाइनेंशियल वेबसाइट के जरिए स्कीम को वेरिफाई करें और किसी भी शक वाले मैसेज की तुरंत रिपोर्ट करें.