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विदेशों में रामलला प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का उत्सव, जानें आज के क्रार्यक्रम का ताजा अपडेट?

कनाडा के ओंटारियो में ओकविले और ब्रैम्पटन जैसे शहरों ने इस दिन को अयोध्या राम मंदिर दिवस ​​​​घोषित किया है. उत्तरी अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय भी इस ऐतिहासिक अवसर को विभिन्न कार्यक्रमों और अनुष्ठानों के साथ मनाने की तैयारी कर रहा है.

Avinash Kumar Singh

नई दिल्ली: आज अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन किया जाएगा. इस मेगा इवेंट में 7,000 से अधिक लोग उपस्थित होंगे, जिनमें राजनेता, मशहूर हस्तियां, उद्योगपति, संत और विभिन्न देशों के लगभग 100 प्रतिनिधि शामिल होंगे. पीएम मोदी सुबह 10.25 बजे अयोध्या एयरपोर्ट पहुचेंगे. यहां से वे सुबह 10.45 बजे अयोध्या हेलिपैड पहुचेंगे. वे सुबह 10.55 पर राम मंदिर पहुंचेंगे. दोपहर 12.05-12.55 बजे प्राण प्रतिष्ठा पूजा में शामिल होंगे. पीएम मोदी दोपहर 1 बजे सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे. दोपहर 2.10 बजे कुबेर टीला पहुंचेंगे. प्राण प्रतिष्ठा के लिए अयोध्या में सेवन लेयर सिक्योरिटी. SPG और NSG कमांडो तैनात हैं. चप्पे-चप्पे पर AI से लैस ड्रोन नजर रख रहे. 

विदेशों में प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव 

यह उत्सव भारत तक ही सीमित नहीं होगा. कनाडा के ओंटारियो में ओकविले और ब्रैम्पटन जैसे शहरों ने इस दिन को अयोध्या राम मंदिर दिवस ​​​​घोषित किया है. उत्तरी अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय भी इस ऐतिहासिक अवसर को विभिन्न कार्यक्रमों और अनुष्ठानों के साथ मनाने की तैयारी कर रहा है. संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 1,000 मंदिर कार रैलियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक समारोह जैसे कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं.

पारंपरिक नागर शैली में मंदिर का डिजाइन

पारंपरिक नागर शैली में मंदिर का डिजाइन 380 फीट की लंबाई, 250 फीट की चौड़ाई और 161 फीट की ऊंचाई है. मंदिर परिसर 70 एकड़ में फैला है, जिसमें मुख्य मंदिर क्षेत्र 2.7 एकड़ और निर्मित क्षेत्र लगभग 57,000 वर्ग फीट है. मंदिर निर्माण में 1800 करोड़ रुपये का बजट है. जिले राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा वित्तपोषित किया गया है, पूरे भारत और विदेशों से 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का दान एकत्र किया गया है. 

बाल रूप में भगवान रामलला की ऐसी होगी मूर्ति

भगवान रामलला की प्रतिमा 51 इंच ऊंची है, जो काले पत्थर से बनी है और बहुत ही आकर्षक ढंग से बनाई गई है. भगवान राम की मूर्ति का चयन चेहरे की कोमलता, आंखों की सुंदरता, मुस्कुराहट और शरीर सहित अन्य चीजों को ध्यान में रखते हुए किया गया है. उन्होंने कहा कि पानी और दूध का पत्थर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. भगवान श्री राम की मूर्ति की लंबाई और इसकी स्थापना की ऊंचाई भारत के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की सलाह पर इस तरह से डिजाइन की गई है. हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को स्वयं भगवान सूर्य श्री राम का अभिषेक करेंगे क्योंकि दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें सीधे उनके माथे पर पड़ेंगी जिससे वह चमक उठेगा.