नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने महाराष्ट्र सरकार की ऑफ-बजट (बजट के इतर) उधारी को लेकर चेतावनी जारी की है, जो राज्य की वित्तीय पारदर्शिता को प्रभावित कर रही है. CAG की 2023-24 की रिपोर्ट में कहा गया, “ऑफ-बजट उधारी के माध्यम से व्यय वित्तपोषण समय के साथ सार्वजनिक देनदारियों को काफी हद तक बढ़ाता है, जिससे कर्ज का जाल बनता है, बिना विधायिका को इन देनदारियों की जानकारी के.” यह रिपोर्ट हाल के मानसून सत्र में राज्य विधानसभा में प्रस्तुत की गई थी.
पारदर्शिता की कमी
ऑफ-बजट उधारी (OBB) सरकार को बजट में इन कर्जों को दर्ज किए बिना व्यय आवश्यकताओं को पूरा करने की अनुमति देती है, जिससे विधायी जांच से बचा जाता है. CAG ने बताया, “ये उधार, जो राज्य के बजट के माध्यम से चुकाए जाते हैं, संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत राज्य की देनदारियां मानी जाती हैं. महाराष्ट्र वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन (MFRBM) अधिनियम के अनुसार, सभी देनदारियों का पूर्ण खुलासा होना चाहिए, लेकिन ऑडिट में पाया गया कि ऑफ-बजट उधारी को बजट दस्तावेजों में प्रकट नहीं किया गया.”
उधारी के स्रोत
CAG ने देखा कि महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) और MSRDC टनल्स लिमिटेड के माध्यम से ऑफ-बजट उधारी की गई. इन संस्थाओं ने वित्तीय संस्थानों के साथ समझौते किए, जिनके मूलधन और ब्याज भुगतान की गारंटी राज्य के बजट से दी गई. CAG ने चेतावनी दी, “महाराष्ट्र सरकार का ऑफ-बजट उधारी का बढ़ता उपयोग न केवल वित्तीय पारदर्शिता को प्रभावित करता है, बल्कि बजटीय नियंत्रण और विधायी निगरानी को भी कमजोर करता है.”
लोकलुभावन योजनाओं का प्रभाव
राज्य में लोकलुभावन योजनाओं, जैसे मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहन योजना, ने वित्तीय दबाव बढ़ाया है. इस योजना के तहत 25 मिलियन से अधिक गरीब महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक दिए गए. CAG ने नोट किया कि 2023-24 में राज्य की राजस्व प्राप्तियां 52.05% बढ़ीं, लेकिन केंद्रीय अनुदान में 29.89% की कमी आई. ऋण-जीएसडीपी अनुपात 2022-23 के 17.42% से बढ़कर 2023-24 में 18.11% हो गया, जो वित्तीय लचीलापन कम होने का संकेत देता है.