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पहलगाम में 26 मासूमों की हत्या कर जंगल भागे थे आतंकी, फिर भारतीय सेना ने 93 दिनों तक खदेड़ कर ऐसे उतारा मौत के घाट

22 अप्रैल को भारतीय इतिहास के काले दिनों में गिना जाएगा. इस दिन जो पहलगाम में हुआ, उसे आज भी लोग भूल नहीं पाते. हालांकि इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन महादेव चलाकर इसका मुंह तोड़ जवाब दिया था.

Grok AI
Shanu Sharma

22 अप्रैल 2025 को भारतीय इतिहास के सबसे काले दिनों में गिना जाता है. आज से ठीक एक साल पहले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने निर्दोष पर्यटकों पर बर्बर हमला किया था. हमलावरों ने पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा और फिर हिंदू तीर्थयात्रियों तथा पर्यटकों को एक-एक कर गोली मार दी. इस हमले में 26 मासूम शहीद हो गए थे. 

पहलगाम हमला हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला था. इसके बाद भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन महादेव शुरू किया, जो की तीन महीने से भी ज्यादा दिनों तक चली. इस दौरान सेना ने पूरे इलाके में आतंकियों की खोज सुरू की. 

क्या था ऑपरेशन महादेव?

पहलगाम हमले के तुरंत बाद भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त अभियान शुरू किया. इस अभियान का नाम ऑपरेशन महादेव रखा गया. यह नाम महादेव रिज क्षेत्र के नाम पर था, जहां आतंकी छिपे हुए थे. अभियान का उद्देश्य केवल आतंकियों को ढूंढना नहीं, बल्कि पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सहित सभी शामिल आतंकियों को उनके कर्मों का फल चखाना था. घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में आतंकी छिप गए थे. ऐसे में उन्हें ढूंढना बेहद चुनौतीपूर्ण था. फिर भी सुरक्षा बलों ने हार नहीं मानी. उन्होंने ड्रोन, थर्मल इमेजिंग कैमरे, सैटेलाइट निगरानी और खुफिया इनपुट्स का पूरा उपयोग किया. 

भारतीय सेना को कैसे मिली सफलता?

इस ऑपरेशन के  दौरान कई बार आतंकियों के सुराग मिले, लेकिन वे जगह बदलकर बच निकलते थे. लेकिन फिर भी सुरक्षा बलों ने धैर्य नहीं खोया और लगातार निगरानी बनाए रखी. 26 जुलाई 2025 को मिलिट्री इंटेलिजेंस को एक महत्वपूर्ण क्लू हाथ लगा. ऊंचे पहाड़ी इलाके में एक मोबाइल सिग्नल की असामान्य गतिविधि दर्ज की गई. आतंकियों के पास खाने-पीने की चीजें खत्म हो चुकी थीं. भूख और बेसब्री में उन्होंने अपना फोन ऑन कर लिया, जिससे उनका ठिकाना उजागर हो गया.

लोकेशन मिलने के बाद पैरा स्पेशल फोर्सेस की टीम को हेलीकॉप्टर से रात में पास के पहाड़ पर उतारा गया. वहीं, राष्ट्रीय राइफल्स की टुकड़ियों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया ताकि कोई आतंकी भाग न सके. पैरा कमांडोज ने कठिन पहाड़ी रास्तों पर लगभग 10 घंटे पैदल मार्च किया. सुबह 8 बजे ड्रोन से आतंकियों की लोकेशन की पुष्टि हुई. जहां तीनों आतंकी अपने टेंट में सो रहे थे, बिना किसी मौके दिए पैरा कमांडोज ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग कर तीनों को ढेर कर दिया.