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राहुल गांधी की टिप्पणी पर भड़के वामपंथी, कहा - 2004 में खुद के दम पर नहीं बना पाये थे सरकार

CPI RSS Comparison: राहुल गांधी द्वारा आरएसएस और माकपा की तुलना किए जाने पर माकपा महासचिव एम. ए. बेबी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने राहुल पर इतिहास और वैचारिक समझ की कमी का आरोप लगाते हुए याद दिलाया कि 2004 में कांग्रेस सरकार वामपंथी समर्थन के बिना नहीं बन सकती थी.

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CPI RSS Comparison: लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों के बीच विपक्षी गठबंधन INDIA में दरार के संकेत मिलने लगे हैं. इसकी ताजा वजह बना कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक विवादास्पद बयान, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPI-M की तुलना कर दी. इस बयान पर माकपा महासचिव एम. ए. बेबी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल के कोट्टायम में शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा, "मैं आरएसएस और माकपा दोनों से वैचारिक लड़ाई लड़ता हूं, लेकिन मेरी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि इनमें लोगों के प्रति कोई संवेदना नहीं है." इस बयान को माकपा ने असंगत और इतिहासविरोधी बताया है.

राहुल गांधी पर किया पलटवार 

एम. ए. बेबी ने 'एक्स' पर अपने आधिकारिक हैंडल से बयान जारी करते हुए राहुल पर पलटवार किया और कहा, "यह बयान राहुल की समझ की कमी को दर्शाता है. उन्हें यह याद रखना चाहिए कि 2004 में कांग्रेस की सरकार वामपंथी समर्थन के बिना नहीं बन सकती थी."

कांग्रेस का रिकॉर्ड कमजोर 

बेबी ने आगे कहा, "केरल में माकपा वर्षों से आरएसएस के खिलाफ राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई का नेतृत्व करती रही है. इस संघर्ष में कांग्रेस का रिकॉर्ड कमजोर रहा है. राहुल को यह बात समझनी चाहिए कि माकपा और आरएसएस की तुलना करना तर्कहीन और अपमानजनक है."

गठबंधन की एकजुटता पर सवाल 

राहुल गांधी के इस बयान से विपक्षी गठबंधन INDIA में असहजता फैल गई है. खास बात यह है कि शनिवार को ही INDIA की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें कांग्रेस और माकपा दोनों शामिल हैं. ऐसे में एक दिन पहले आया यह बयान गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है.

बयान में राहुल को दिया सलाह 

बेबी ने अपने बयान में राहुल को सलाह देते हुए कहा, "जब आप माकपा के खिलाफ बोलें, तो कम से कम इतिहास और मौजूदा राजनीतिक संदर्भ को गंभीरता से समझें. केवल बयानबाजी से गठबंधन नहीं चलते."

माकपा की यह नाराजगी 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि माकपा की यह नाराजगी INDIA गठबंधन में विचारधारा और नेतृत्व को लेकर चल रहे आंतरिक मतभेदों को उजागर करती है. अब यह देखना अहम होगा कि शनिवार की बैठक में इस मुद्दे को लेकर कौन-सा रुख सामने आता है.